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मां नहीं बेटे को जाना था शादी में

Sun, 24 Feb 2019 10:41 PM IST
बृजमोहन बृजमोहन अमर उजाला ब्यूरो चंपावत।
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निर्माणाधीन बारहमासी मार्ग में तिलौन के पास खतरे की जद वाले पेड़। - फोटो : अमर उजाला
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शादी में मां की जगह बेटे को जाना था, लेकिन मां की जिद के आगे बेटे की नहीं चली और आगे जाकर मां हादसे का शिकार हो गईं। ग्रामीणों का कहना है कि मां ने एक बार बेटे की बलाएं अपने ऊपर ले लीं। वहीं इस कार में श्रीखंड चौड़ से एक पुलिस कर्मी पूरन सिंह सामंत भी सवार हुए थे लेकिन वह हादसे से कुछ देर पहले ही पेट्रोल पंप के पास उतर गए थे। जैसे ही उन्हें हादसे का पता चला मौके पर पहुंचकर राहत कार्य में जुटे, लेकिन उनके और आसपास के लोगों के प्रयासों के बाद भी दोनों महिलाओं को बचाया नहीं जा सका।

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 कनलगांव की बुजुर्ग दुर्गा देवी को अधिक उम्र के चलते परिवार के लोग विवाह समारोह में जाने से रोकते रहे। इस समारोह में यहां अमीन पद पर कार्यरत बेटे भुवन चंद्र पांडेय को जाना था, लेकिन मां की जिद के आगे किसी की एक न चली। नाती गौरव पांडेय ने आमा दुर्गा देवी को बाइक से छतार तक छोड़ा। छतार से वह भगवती पांडेय को साथ लेकर लोहाघाट के लिए कार में रवाना हुई।

तिलौन से एक किलोमीटर पहले कार में सवार पुलिस कर्मी पूरन सिंह ने कार रुकवाई और अपने घर चले गए। वह घर पर बैठे ही थे कि उन्हें पता चला कि घर से एक किलोमीटर दूर एक कार पर पेड़ गिर गया है, फौरन वह मौके पर पहुंचे तो पता चला यह वही कार है, जिससे वह घर आए थे। इसी बीच एसडीएम सीमा विश्वकर्मा, दरोगा सोनू बोहरा, विजय कुमार के नेतृत्व में पुलिस और आपदा की टीम मौके पर पहुंची और पेड़ को हटाया।
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टीम ने बताया कि कार के पिछले हिस्से में पड़े गिरने से कार पिचक गई थी। दम घुटने और कार पिचकने से दोनों महिलाओं की मौत हुई है। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद दुर्गा देवी का शव परिजनों को सौंप दिया है, जबकि भगवती पांडेय के तीनों बच्चें बाहर होने की वजह से परिजनों ने सोमवार को पोस्टमार्टम कराने का आग्रह किया है। उधर देर शाम दुर्गा देवी का अंतिम संस्कार भी कर दिया गया।

...यह हादसा नहीं, हत्या है!
चंद्रशेखर जोशी 
चंपावत। टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग में निर्माणाधीन बारहमासी रोड पर स्थित स्वांला, बाराकोट, बनलेख और अमरूबैंड के पास 22 जुलाई से सात अगस्त के दौरान बोल्डर और पेड़ गिरने से जन हानि तो नहीं हुई, लेकिन वाहनों को काफी नुकसान पहुंचा। इन हादसों से सबक लेने के बजाय इन्हें नजरंदाज कर दिया गया, जिसका खामियाजा जिम्मेदारों को तो नहीं बल्कि बेगुनाह दो महिलाओं को अपनी जान देकर भुगतना पड़ा। तिलौन में कार के ऊपर गिरा पेड़ हादसे से ज्यादा प्रशासन की निष्क्रियता को उजागर करता है। लोग इसे हादसा नहीं, हत्या करार दे रहे हैं। 

टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग में 150 किमी की बारहमासी सड़क की कटिंग ने कई हजार पेड़ों को जमींदोज किया। वन विभाग के मुताबिक 7100 पेड़ पहले काट दिए गए थे, इसके बाद खतरे की जद में आने वाले 401 पेड़ों को काटा गया। लेकिन, रोड कटिंग के चलते हो रहे भूस्खलन से अब भी ढेरों पेड़ ऐसे हैं, जो कभी भी धराशायी होकर किसी बड़े हादसे का सबब बन सकते हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग खंड और वन विभाग का कहना है कि इस मार्ग में 159 पेड़ खतरनाक स्थिति वाले हैं। कटिंग के बाद होने वाले भूस्खलन से ये पेड़ कमजोर हो रहे हैं। इनमें कुछ भारी-भरकम पेड़ हल्की हवा में भी गिर सकते हैं। 

समीक्षा भी बस खानापूरी 
बारहमासी सड़क के निर्माण की समीक्षा के लिए पिछले साल छह जुलाई को केंद्रीय सड़क परिवहन राज्यमंत्री मनसुख एल मांडविया ने कलक्ट्रेट में रोड के काम की गति का जायजा लिया, लेकिन समीक्षा पहलुओं पर ध्यान नहीं दिया गया। निर्माणाधीन बारहमासी रोड में पिछले साल 22 जुलाई को यहां से स्थानांतरित होकर उत्तरकाशी जा रहे एडीएम हेमंत कुमार वर्मा की कार पर स्वांला के पास भारी-भरकम पत्थर गिर गया। एडीएम बाल-बाल बच गए, लेकिन कार क्षतिग्रस्त हो गई। रुद्रप्रयाग जिले में भी निर्माणाधीन बारहमासी सड़क के अगस्त्य मुनि-गौरीकुंड मोटर मार्ग पर भीरी और बांसबाड़ा के बीच 21 दिसंबर को चट्टान गिरने से सात मजदूरों की मौत हुई थी। इसके बावजूद बारहमासी मार्ग पर राष्ट्रीय राजमार्ग खंड ने सुरक्षा के ठोस उपाय नहीं किए हैं। 



15 डेंजर जोन, बरते सावधानी 
एसपी धीरेंद्र गुंज्याल ने बताया कि अमरूबैंड, सिन्याड़ी, चल्थी, अमोड़ी, स्वांला, धौन, बनलेख, मुडिय़ानी, मिलौन, मानेश्वर, बापरू, बाराकोट सहित 15 डेंजर जोन चिन्हित किए गए। इन खतरे वाली जगहों पर वाहन आवाजाही में अतिरिक्त सावधानी बरतें। 


फोटो 24 सीपीटी 05पी व 06पी 
कोट 
बारहमासी में रोड किनारे खतरे वाले पेड़ों को काटने के लिए वन विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग खंड से मिलकर जरूरी कार्यवाही करने को कहा गया है। दोनों विभागों को सुरक्षागत पहलुओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के आदेश दिए गए हैं। 
सीमा विश्वकर्मा, उप जिला मजिस्ट्रेट, चंपावत

निर्माणाधीन बारहमासी मार्ग में 15 जगह पेड़ों से खतरा बना हुआ है। काम कराने वाली एजेंसी को इन स्थानों पर सावधानी से काम करने की हिदायत दी गई है। साथ ही इन पेड़ों को काटने की प्रक्रिया चल रही है। 
एनसी पांडेय, सहायक अभियंता एनएच खंड, लोहाघाट। 


एनजीटी की रोक से नहीं कट पा रहे हैं खतरा बने 85 पेड़ 
खतरे की जद में आ रहे कई पेड़ों को काटने में तकनीकी पेंच भी आड़े आ रहा है। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) द्वारा लगाई गई रोक से इन पेड़ों को नहीं काटा जा सका है। वन क्षेत्राधिकारी हेम चंद्र गहतोड़ी ने बताया कि वन विभाग ने राष्ट्रीय राजमार्ग में बापरू से घाट के बीच 85 पेड़ों का छपान करा दिया था। छपान के बाद इन पेड़ों को वन निगम को काटना था, लेकिन पिछले साल अक्तूबर में एनजीटी की रोक के बाद कटान का काम रूक गया है। 


अमरूबैंड के जख्मों को हरा कर गया तिलौन हादसा 
टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग में तिलौन के पास रविवार को हुए कार हादसे ने नौ साल पूर्व हुए अमरूबैंड रोडवेज बस दुर्घटना की खौंफनाक याद दिला दी। 17 जुलाई 2008 को अमरूबैंड में पिथौरागढ़ डिपो की रोडवेज बस पर एक भारी-भरकम पत्थर गिरा। बस में सवार 19 यात्रियों की मौत हुई। जबकि 17 लोग घायल हो गए थे। 

बारहमासी रोड कटिंग के बाद 31 हादसों में 51 मौतें 
चंपावत। नवंबर 2017 से शुरू बारहमासी सड़क के बाद से अब तक 33 हादसे हो चुके हैं। महज 16 माह में के दौरान हुए हादसों में 53 लोगों की मौत और 79 लोग घायल हो चुके हैं। ये आंकड़ा राज्य बनने के बाद से सर्वाधिक है। इसके अलावा पिछले साल बारहमासी मोटर मार्ग में सिंगदा के पास एक मजदूर की चट्टान की चपेट में आने से और बाराकोट में एक महिला की पेड़ की चपेट में आने से मौत हुई। 

चंपावत जिले में 2018 से अब तक हुए प्रमुख सड़क दुर्घटनाएं: 
16 जनवरी:स्वांला के पास खाई में बाइक के गिरने से दोनों सवारों की मौत। 
7 फरवरी:स्वांला जीप दुर्घटना में 10 लोगों की मौत। 
18 मई:टनकपुर में डंपर हादसे में हताहत हुए 11 तीर्थयात्री। 
14 जुलाई:बनलेख के छतकांडा में 250 मीटर गहरी खाई में गिरी जीप, चार लोगों की मौत, सात घायल। 
30 जुलाई:निडिल के पास कार खाई में गिरी, मां-बेटे की मौत। 
18 अगस्त:छुलापै के पास भिड़ंत के बाद खाई में गिरी कार, दो युवकों की मौत, तीन घायल। 
13 दिसंबर:पंचेश्वर के पास छनखोला में कार खाई में गिरी, दोनों सवारों की मौत। 
27 जनवरी:बाराकोट के च्यूरानी के पास पिकअप जीप खाई में गिरी, 9 लोगों की मौत। 


बारहमासी मार्ग पर 2018 से अब तक पेड़ और मलबा गिरने का ब्यौरा 
22 जुलाई: स्वांला के पास एडीएम हेमंत कुमार वर्मा की कार पर पत्थर गिरा। बाल-बाल बचे, वाहन क्षतिग्रस्त।
25 जुलाई : लोहाघाट-बाराकोट के बीच पेड़ गिरने से बाल-बाल बचे जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ.सुरेश उप्रेती।
26 जुलाई: बनलेख के पास धौन राजकीय इंटर कॉलेज के चार शिक्षकों की कार में पत्थर गिरा, बाल-बाल बचे।
7 अगस्त: अमरूबैंड के पास हल्द्वानी को जा रहे हल्द्वानी वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी चंद्रशेखर सनवाल की जीप पर पत्थर गिरा, जीप का पिछला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त, बाल-बाल बचे डीएफओ और अन्य लोग।

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