सड़क की मांग को लेकर चुनाव बहिष्कार करने वाले गांव अब अपनी मांग को नए तरीके से उठाएंगे। चुनाव बहिष्कार की जगह अब ये अपने वोट का उपयोग प्रत्याशियों पर एकजुट होकर दबाव बनाने के लिए करेंगे। रोड नहीं तो वोट नहीं की जगह अब इनका नारा जो देगा रोड, उसे पड़ेंगे वोट होगा।
सामान्य रूप से चुनाव की घोषणा होते ही कई गांवों में सड़क नहीं तो वोट नहीं के नारे के साथ चुनाव बहिष्कार का आह्वान होने लगता है। चंपावत जिले में क्वैराला घाटी समग्र विकास जनमंच ने नई मुहिम चलाने का ऐलान किया है। जिले के सिप्टी न्याय पंचायत में सिप्टी-अमकड़िया सड़क की मांग वर्ष 2004 से लगातार उठ रही है। इस बीच में हुए लोकसभा और विधानसभा के चार चुनावों में यहां के ग्रामीण रोड नहीं तो वोट नहीं का नारा देकर चुनाव बहिष्कार कर चुके हैं।
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अब संस्था ने चुनाव बहिष्कार वाले क्षेत्रों में लोगों को मतदान के महत्व की जानकारी देने का फैसला किया है। जनमंच के अध्यक्ष प्रकाश जोशी ने बताया कि क्षेत्र में चुनाव प्रचार में आने वाले प्रत्याशियों और उनके समर्थकों से लिखित हलफनामा लिया जाएगा। इस हलफनामे में संबंधित क्षेत्र में सड़क बनाने के लिए प्रत्याशी की ओर से क्या-क्या किया गया है और जीतने के बाद क्या किया जाएगा की जानकारी दर्ज होगी।
रोड नहीं तो वोट नहीं वाले गांवों में जागरूकता अभियान चलाने के लिए निर्वाचन आयोग भी गंभीर है। विधानसभा चुनाव के लिए नियुक्त स्वीप प्रेक्षक अभिषेक दयाल ने चुनाव बहिष्कार की घोषणा संबंधी आंदोलन वाले क्षेत्रों में विशेष जागरूकता कार्यक्रम चलाने के निर्देश दिए हैं।