उत्तर प्रदेश के दौर से (1999 से 2001 तक) दमदार शराब विरोधी आंदोलन छेड़ने वाले लोहाघाट के मौजूदा विधायक (तब जिला पंचायत सदस्य) पूरन सिंह फर्त्याल शराबबंदी पर प्राइवेट मेंबर बिल पेश करेंगे। वह शराब को पहाड़ की बर्बादी की जड़ बताते हैं।
बिहार में अप्रैल 2016 से शराबबंदी के एलान के बाद फिर से उत्साहित विधायक फर्त्याल कहते हैं कि बिहार जैसा बड़ा राज्य अगर ऐसा साहसिक फैसला ले सकता है, तो इसे उत्तराखंड में क्यों नहीं किया जा सकता है। उनका कहना है कि वे इसके लिए अपने स्तर से विधानसभा से लेकर पंचायतों तक में पहल करेंगे। साथ ही विधानसभा के अगले सत्र में शराबबंदी के लिए प्राइवेट मेंबर बिल पेश करेंगे, जिसमें शराबबंदी से लेकर अवैध रूप से बनने वाली शराब की रोकथाम के लिए कड़े प्रावधान हो।
विधायक का कहना है कि इसके लिए महिला मंगल दल, युवक मंगल दल सहित ग्रामीण संगठनों को अपने स्तर से सक्रिय करने का प्रयास करेंगे। फर्त्याल के नेतृत्व में चली जबर्दस्त मुहिम के बाद वर्ष 2000 में चंपावत जिले की दो स्वीकृत शराब की दुकानों को शासन निरस्त करने को मजबूर हुआ था।