टनकपुर-चंपावत राजमार्ग किनारे चल्थी नदी क्षेत्र खनन माफिया के लिए सोने की खान बना हुआ है। छापे में अवैध खनन का मामला उजागर होने से अब खनन माफिया में हड़कंप मचा है, लेकिन छापे के बाद की कार्रवाई से पता चलेगा कि प्रशासन अवैध खनन के इस धंधे पर अंकुश लगाने की दिशा में क्या कदम उठाता है। एसडीएम और खनन विभाग की संयुक्त जांच रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि पट्टे वाली सीमांकित भूमि के बजाय माफिया द्वारा नदी के प्रतिबंधित क्षेत्र में धड़ल्ले से अवैध खनन किया जा रहा है। अवैध खनन का यह खेल नया नहीं, बल्कि लंबे अर्से से चल रहा है। बावजूद इसके अब तक अवैध खनन का यह खेल चंपावत-टनकपुर के बीच आते-जाते अफसरों को क्यों नजर नहीं आया।
जिला मुख्यालय चंपावत एवं टनकपुर के बीच चल्थी क्षेत्र में खनन माफिया का राज कायम है। ग्रामीणों द्वारा कई बार शिकायत करने पर भी प्रशासन का मूक दर्शक बने रहना संदेह पैदा करता है। या यूं कहें कि अवैध खनन की ओर प्रशासन की नजरअंदाजी से माफिया की मौज हो रही है। बता दें कि चल्थी का खनन क्षेत्र राजमार्ग के किनारे ऐसी जगह पर है, जहां से खनन क्षेत्र साफ नजर आता है, लेकिन आश्चर्य यह है कि टनकपुर-चंपावत के बीच आवाजाही करने वाले जिले के जिम्मेदार अधिकारियों को माफिया का यह अंधेरराज नजर नहीं आया। ग्रामीणों के मुताबिक खनन से नदी का रुख बदल रहा है और कटाव से ग्रामीणों की कृषि भूमि नदी रोखड़ में तब्दील हो रही है।
सोमवार को एसडीएम अनिल चन्याल एवं भूतत्व और खनिकर्म विभाग के उप निदेशक व भूवैज्ञानिक लेखराज द्वारा संयुक्त रूप से राजस्व विभाग की टीम के साथ छापा मारा गया तो तहसील क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले तीन में से दो पट्टाधारकों के स्टाक में अवैध खनिज सामग्री डंप मिली। जिसे सीज कर आरोपी जोगा सिंह पर 32 लाख एवं महिला पट्टाधारक संतोष वर्मा पर 12.78 लाख रुपये का जुर्माना डाला गया है। एसडीएम ने बताया कि स्थलीय निरीक्षण में पाया गया कि जोगा सिंह द्वारा अपने सीमांकित क्षेत्र के बजाय नदी के प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध खनन किया है, वहीं महिला पट्टाधारक संतोष वर्मा ने अपने सीमांकित क्षेत्र के साथ ही नदी के प्रतिबंधित क्षेत्र से भी अवैध खनन किया है।
डीएम के विवेक पर ही अग्रिम कार्रवाई
टनकपुर। चल्थी में पकड़े गए अवैध खनन की रिपोर्ट अग्रिम कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी को भेजी गई है। अग्रिम कार्रवाई जिलाधिकारी के विवेक पर निर्भर है। जानकारों के मुताबिक जिलाधिकारी चाहे तो जुर्माना वसूली की कार्रवाई के बाद हिदायत देकर छोड़ सकते हैं या फिर जुर्माना वसूली के साथ ही आरोपियों के पट्टे भी निरस्त करने की संस्तुति कर रिपोर्ट शासन को भेज सकते हैं। बता दें कि प्रशासन ने गत वर्ष भी चल्थी क्षेत्र में छापा मारकर अवैध खनिज भंडारण पकड़ा, लेकिन तब किसी पट्टाधारक के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई और बरामद खनिज सामग्री को लावारिस दर्शाकर सीज किया गया था।
प्रशासन के अंदर तक है माफिया की घुसपैठ
टनकपुर। खनन माफिया की प्रशासन के अंदर तक घुसपैठ है। जो छापे की कार्रवाई की सूचना छापामार दल के पहुंचने से पहले ही माफिया तक पहुंचा देते हैं। सोमवार को भी यहीं हुआ। बताया जाता है कि एसडीएम के नेतृत्व में छापा पड़ने की भनक लगने से चल्थी क्षेत्र में सन्नाटा पसर गया था, जबकि सामान्य दिनों में वहां हर दिन खनन कार्य चलता रहता है।