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कब पूरा होगा रोपवे से मां पूर्णागिरि दर्शन का सपना

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मां पूर्णागिरि धाम में रोपवे के लिए दो साल पूर्व बना प्लेटफार्म। - फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। प्रदेश के सबसे बड़े मां पूर्णागिरि धाम मेले का बुधवार को श्रीगणेश हो गया। मगर आस्था के इस महत्वपूर्ण धाम में रोपवे (रज्जुमार्ग) से मुख्य मंदिर तक पहुंचने का श्रद्धालुओं का सपना पूरा होने में लंबा समय लगेगा। 35 करोड़ रुपये की लागत से पब्लिक-प्राइवेट-पाटनरशिप (पीपीपी) मोड से हनुमान चट्टी से काली मंदिर तक 903.22 मीटर लंबे इस रोपवे को दिसंबर 2016 में पूरा हो जाना था, मगर पूरा होना तो दूर, तीन साल से काम ही अधर में लटका है।
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रोपवे के लिए उत्तराखंड सरकार ने केआर आनंद एंड केआरए इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्राइवेट कंपनी के साथ 2014 में एमओयू (सहमति पत्र) किया था। जून 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने रोपवे का शिलान्यास किया, मगर इसके बाद काम को लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखाई दी। इस काम को दिसंबर 2016 में पूरा कर लिया जाना था। मगर पेड़ काटे जाने, प्लेटफार्म बनाने, बिजली संयोजन लेने के अलावा कोई खास काम नहीं हुआ। इधर कंपनी का कहना है कि यूटीडीबी (उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद) से इंजीनियर नहीं मिल सके हैं। इसके लिए प्रशासन से आग्रह किया गया है। इंजीनियर मिलने पर काम शुरू हो जाएगा।
कोट
यूटीडीबी के इंजीनियर नहीं मिलने से काम अटका है। जिलाधिकारी के माध्यम से पर्यटन सचिव को दो बार पत्र भेजा जा चुका है। यूटीडीबी के इंजीनियर नहीं मिल पाने की सूरत में लोनिवि या ग्रामीण निर्माण विभाग के अभियंताओं को अधिकृत करने का आग्रह किया गया है।
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-लता बिष्ट, जिला पर्यटन अधिकारी, चंपावत।
10 मिनट में होगा पूरा 70 मिनट का सफर
रोपवे बनने से तीन किमी की पहाड़ी के फासले को पैदल नहीं लांघना पड़ेगा। 70 मिनट के पैदल सफर को रज्जुमार्ग से सिर्फ 10 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। काली मंदिर से मुख्य मंदिर की दूरी महज 200 मीटर है। दिव्यांगों की मां के दर्शन करने की साध पूरी होगी। समय की बचत के अलावा बुजुर्ग, बच्चे व पहाड़ में चलने में अक्षम लोगों को भी लाभ होगा। धाम के पुजारियों का कहना है कि रोपवे से श्रद्धालुओं की सुविधाएं बढ़ने के साथ धाम में आने वालों की तादात भी बढ़ेगी।
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