अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत। कोरोना वायरस से बचने के लिए देश में जारी तीसरे चरण के लॉकडाउन के बीच यहां कारोबार ठंडा है। सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है चाय की दुकान से गुजर करने वालों को। बीते 48 दिनों से दुकानें बंद रहने से एक भी रुपया हाथ नहीं आया। दुकान का किराया तक जेब से भरना पड़ रहा है। रोजमर्रा का खर्चा पुरानी बचत से करने को मजबूर हैं। चंपावत जिले में 400 से ज्यादा चाय की दुकानें हैं। 22 मार्च से ये दुकानें लॉकडाउन की वजह से नहीं खुल सकी हैं। इसके चलते न केवल उनकी आमदनी पर असर पड़ा है, बल्कि बाजार में लोगों को चाय भी नहीं मिल पा रही है। दुकानदारों का कहना है कि जब शराब की दुकान खोल दी है तो चाय की दुकान क्यों नहीं खोली जा रही हैं।
इधर डीएम सुरेंद्र नारायण पांडेय ने कहा कि चाय की दुकान खोलने की जल्द ही अनुमति जारी कर दी जाएगी। अलबत्ता सोशल डिस्टेंसिंग और अन्य जरूरी सावधानियां बरतनी होंगी। दुकान में बिठाकर चाय नहीं पिलाई जा सकेगी। चाय को डिस्पोजिबल बर्तन में दिया जा सकेगा।
--: लॉकडाउन ने तोड़ दी कमर :: "चाय की दुकान से ठीकठाक कमाई हो जाती थी। लेकिन सात सप्ताह के लॉकडाउन ने कमर तोड़ दी है। आमदनी पर ब्रेक लगने से परेशानी बढ़ रही है।" -भगवत नेगी।
--:: जेब से देंगे किराया : "दुकान बंद होने से आमदनी तो दूर, अब तो दुकान का किराया भी जेब से देना होगा। परिवार का भरणपोषण पुरानी बचत से हो रहा है।" -सुरेश जोशी।
-:: रोजी-रोटी की चुनौती : "चाय की दुकान से परिवार की गाड़ी ठीक से चल रही थी, लेकिन इस बीच हुए लॉकडाउन ने रोजी-रोटी की मुसीबत मुंह बाए खड़ी कर दी है।" -मदन मोहन पांडेय।
-:: जेब पर पड़ रही मार : "मैने अपनी जिंदगी में कभी भी दुकान बंद नहीं की। मगर अब लगातार 48 दिन से दुकान में ताला है। इसकी मार जेब पर पड़ रही है।" -मुरली जोशी।
सुरेश जोशी।
- फोटो : AMAR UJALA
सुरेश जोशी।
मदन मोहन पांडेय।
- फोटो : AMAR UJALA
मदन मोहन पांडेय।
भगवत नेगी।
- फोटो : AMAR UJALA
भगवत नेगी।