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Champawat News: सड़क नहीं आई तो अपने भी बिछड़ गए, पलायन अब भी जारी

Thu, 29 Feb 2024 10:43 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
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पंकज पाठक
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चंपावत। जिला मुख्यालय से करीब 18 किमी दूर स्थित ग्राम पंचायत भंडार बोरा रौकुंवर गांव का दर्द प्रशासन और सरकार महसूस नहीं कर पा रहे हैं। गांव तक सड़क लाने के लिए यहां के लोगों ने कई बार प्रयास किए लेकिन आज भी ग्रामीणों को नजदीकी सड़क तक पहुंचने के लिए छह किमी पैदल चलना पड़ता है। सड़क नहीं होने के कारण गांव की आबादी आधी रह गई है। लोग सुविधाओं को ढूंढते-ढूंढते जिला, मंडल और राज्य को छोड़कर जाने कहां-कहां जाकर बस गए हैं और गांव खाली होता जा रहा है।
ग्राम पंचायत भंडार बोरा रौकुंवर गांव के ग्रामीणों का कहना है कि जाड़ा बरदोली से हरेश्वर महोदव तक सड़क बन जाए तो मेटी, सरसूड़ा, बसौली, रौकुंवर और भंडार बोरा के लोगों को लाभ मिलेगा। ग्रामीणों ने बताया कि एक समय गांव में दो हजार के करीब लोग रहते थे लेकिन आज एक हजार लोग ही गांव में रह गए हैं। सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। गर्भवतियों, बीमारों के लिए डोली ही एक सहारा है।
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सड़क नहीं होने के कारण कई लोगों मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जिला मुख्यालय और अन्य शहरों में निवास करने लगे हैं। युवाओं ने रोजगार की तलाश में गांव छोड़ दिया है। गांव में कई बुजुर्ग ऐसे हैं जिन्होंने सड़क के इंतजार में अपनी उम्र बिता दी है। हालांकि आज भी उन्हें उम्मीद है कि उनके जीते जी एक दिन सड़क उनके गांव तक जरूर पहुंचेगी। बता दें कि गांव के लोग पूर्व में लोकसभा चुनाव का भी बहिष्कार कर चुके हैं। फिर भी सड़क नहीं बनी। संवाद



पढ़ने के लिए आठ किमी की दौड़



चंपावत। ग्राम पंचायत भंडार बोरा रौकुंवर के बच्चों के लिए पढ़ाई आसान नहीं है। इंटर की पढ़ाई के लिए उन्हें दिगालीचौड़ विद्यालय जाना पड़ता है। यह गांव से करीब आठ किमी की दूर है। बदहाल रास्तों से होकर गांव के सात बच्चे रोज पढ़ाई के लिए घंटों की यात्रा कर पढ़ने पहुंचते हैं। अगर सड़क होती तो बच्चे गांव से वाहन में बैठकर दिगालीचौड़ विद्यालय पढ़ने जाते। संवाद

गांव तक नहीं पहुंचा वाहन
चंपावत। गांव के तेज सिंह टैक्सी संचालन कर जीवन यापन करते हैं। कुछ साल पहले उन्होंने टैक्सी खरीदी थी। अब उनकी टैक्सी का परमिट पूरा होने वाला है। आज भी वह गांव से पांच किमी दूर अपना वाहन खड़ा करते हैं। फिर गांव तक पैदल जाते हैं। वह तो गांव पहुंच जाते हैं लेकिन उनकी टैक्सी नहीं पहुंच पाई। लक्ष्मण सिंह कुंवर ने पहले ऑल्टो वाहन खरीदा और इसका संचालन टैक्सी के रूप में किया लेकिन जब गांव तक सड़क नहीं पहुंची तो उन्होंने टैक्सी वाहन को निजी वाहन में पंजीकृत करवा लिया। संवाद
कोट

सड़क नहीं होने के कारण मूलभूत सुविधाएं मिलना बहुत मुश्किल हो जाता है। रोजगार की तलाश में गांव से निकला और हरियाणा में पिछले कुछ समय से कार्य कर रहा हूं। जब भी आता हूं सड़क नहीं होने का दर्द रुलाता है। - चंचल बोरा, स्थानीय।





सड़क के इंतजार में उमर गुजर गई। गांव तक सड़क नहीं पहुंची तो एक दिन गांव पूरी तरह खाली हो जाएगा। एक जमाने में गांव में आबाद था। आज आबादी आधी ही रह गई है। कोई दर्द समझने वाला नहीं है। - डिगरी देवी (85), स्थानीय।


गांव तक पहुंचना आसान नहीं है। थकावट भरा सफर रहता है। गांव से नजदीकी सड़क के लिए करीब छह किमी पैदल चलना पड़ता है। वर्तमान में जिस सड़क का सर्वे हुआ है उससे गांव के लोगों को लाभ नहीं मिलेगा। गांव में धान, गेहूं, आम और अमरूद की अच्छी पैदावार होती है लेकिन सड़क नहीं होने के कारण उत्पाद बाजार तक नहीं पहुंच पाता है। - महेश, ग्राम प्रधान, भंडार बोरा रौकुंवर।
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जाड़ा से हरेश्वर के नाम से सड़क स्वीकृत है लेकिन स्वीकृत सड़क हरेश्वर तक नहीं है। पूर्व में सर्वे के दौरान सड़क हरेश्वर क्षेत्र तक पहुंच रही थी लेकिन ग्रेड खराब होने के कारण इसे स्वीकृति नहीं मिली। वर्तमान सड़क सर्वे में अगर गांव तक सड़क नहीं आ रही है तो ग्रामीण प्रस्ताव दें, फिर से सर्वे कराने का काम किया जाएगा। - मनोज बिष्ट, एई, लोनिवि, चंपावत।
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