चंपावत। मुख्यालय से 59 किमी दूर तलियाबांज गांव में पेयजल के लिए हाहाकार मचा हुआ है। ग्रामीण पानी की किल्लत झेलने को मजबूर हैं। बीते तीन माह से यहां के नलों से पानी की एक बूंद नहीं टपकी है। ग्रामीण एक किलोमीटर दूर धारे से पानी लाकर प्यास बुझा रहे हैं।
तीन सौ आबादी वाले इस गांव में लोगों प्यास बुझाने के लिए 1990 में जेठापानी तलियाबांज पेयजल योजना का निर्माण किया गया। पिछले मार्च माह में इस योजना की लाइन मथियाबांज सड़क से निकले मलबे की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गई। चार माह बीतने के बाद भी पेयजल लाइन ठीक नहीं हो सकी है। ग्रामीणों को एक किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ रहा है।
योजना से पेयजल आपूर्ति न होने के कारण गांव हाईस्कूल और प्राथमिक विद्यालय में मध्याह्न भोजन बनाने में काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। भोजनमाता करीब 800 मीटर दूर धारे से पानी लाना पड़ रहा है। पूर्व ग्राम प्रधान ईश्वरी देवी, शंकर जोशी, हरीश, भुवन जोशी, राजेश, नीरज, अजय जोशी का कहना है कि धारे से पानी भरने में महिलाओं, युवाओं और बच्चों का अनावश्यक रूप से समय बर्बाद हो रहा है। उन्होंने शीघ्र ही पेयजल लाइन को ठीक नहीं करने पर आंदोलन की धमकी दी है। इस संबंध में जल संस्थान के अपर सहायक अभियंता बीआर कुआर्बी का कहना है कि जेठापानी तलियाबांज पेयजल योजना ग्राम पंचायत को हस्तांतरित की गई है। पेयजल योजना की मरम्मत का काम ग्राम पंचायत के पास है।
जिला मुख्यालय में हैंडपंप से पानी भर रहे लोग
चंपावत। जिला मुख्यालय में पेयजल किल्लत से निपटने के लिए लोग दूरदराज से हैंडपंप व नौलों से पानी ढोने को मजबूर है। अपर सहायक अभियंता किशोर पंत ने बताया कि मोटर स्टेशन, पिथौरागढ़ रोड, जीआईसी रोड, कनलगांव, मांदली, छतार, टनकपुर रोड, गोरलचौड़, तल्लीहाट और मल्लीहाट में विभागीय टैंकर और पिकअप के जरिए पानी बांटा जा रहा है। बताया गया कि रौखेत स्रोत में 90 फीसदी, जबकि ललुवापानी, दुधाधारी और छीड़ापानी स्रोत में 40 से 60 फीसदी की कमी आ गई है।
लोहाघाट में महिलाओं ने साफ किए नौले
लोहाघाट (चंपावत)। शहर में गहराते पेयजल संकट को देखते हुए महिलाओं ने क्षेत्र के नौलों की सफाई का कार्य शुरू कर दिया है। नौलों के भीतर पड़ी गंदगी को साफ करने के साथ लोगों से पानी को स्वच्छ रखने का आह्वान किया। नगर पंचायत अध्यक्ष लता वर्मा के नेतृत्व में महिलाओं ने कचहरी मोहल्ले के नौले में विशेष स्वच्छता अभियान संचालित किया। महिलाओं का कहना था कि प्राकृतिक नौलों को साफ रखने से शुद्ध पानी तो मिलेगा ही, साथ ही पानी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। इस मौके पर गीता धौनी, सरोज जोशी, गोविंदी फर्त्याल, ज्योति राय, लीला राय, तुलसी प्रसाद, गिरीश पांडेय, गोविंद वर्मा, संतोष बाल्मिकी, पप्पू, सतीश कुमार आदि शामिल थे।