उत्तर भारत के प्रमुख मां पूर्णागिरि मेले में दूषित नाले का पानी पिलाकर श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य से खिलवाड़ के मामले की अमर उजाला में खबर छपते ही मेला प्रशासन में हड़कंप मच गया है। सोमवार को जलसंस्थान के अधिकारियों की टीम ने आनन-फानन में छापा मारकर दूषित सेलागाड़ नाले में लगी पाइप लाइनों को उखाड़ कर जब्त किया है, जबकि वहां लगे टुल्लू पंप और टैंकों को दुकानदारों ने पहले ही हटा लिया था। हिदायत दी है कि दोबारा नाले के पानी का प्रयोग करते पकड़े जाने पर संबंधित के खिलाफ मुकदमा दर्ज होगा। इधर, विभाग ने जांच के लिए नाले के पानी का सैंपल भी लिया है।
मां पूर्णागिरि धाम क्षेत्र में पानी की कमी के चलते जरूरत पूरी करने को भैरव मंदिर क्षेत्र के अलावा टुन्यास एवं कटौजिया क्षेत्र के कई दुकानदार सेलागाड़ नाले के गंदे पानी का बेरोकटोक उपयोग कर रहे थे। नाले का गंदा पानी खींचने को दुकानदारों ने निजी पाइप लाइनें बिछाकर पावरफुल टुल्लू पंप भी लगाए हैं। और तो और नाले का पानी स्टाक करने के लिए दो-दो हजार लीटर के प्लास्टिक टैंक भी लगाए गए हैं। भैरव मंदिर से ऊपर की दुकानों के शौचालयों एवं बाथरूमों के पानी की निकासी इसी नाले में होती है। इस नाले के पानी का दुकानदार खुद तो उपयोग नहीं करते, लेकिन यात्रियों के लिए पानी की जरूरत इसी से पूरी कर रहे थे, बावजूद इसके मेला प्रशासन मौन बना था।
सोमवार को अमर उजाला में इस आशय की खबर छपते ही मेला प्रशासन में हड़कंप मच गया। मेला मजिस्ट्रेट एसडीएम अनिल चन्याल एवं मेला अधिकारी राजेश कुमार के निर्देश पर जलसंस्थान के एई प्रेमजी श्रीवास्तव के नेतृत्व में टीम ने छापा मारकर वहां लगी पाइप लाइनों को जब्त कर लिया। एई ने बताया कि नाले का पानी वास्तव में दूषित है। कुछ दुकानदारों द्वारा पाइप लगाकर पानी खींचा जा रहा था। टीम के वहां पहुंचने से पहले ही दुकानदारों ने वहां लगे टुल्लू पंप और पानी के टैंक हटा लिए थे। उन्होंने बताया कि टेस्टिंग के लिए नाले के पानी का सैंपल लिया गया है।
विभागीय जलापूर्ति की भी जांच हुई
दूषित नाले में लगी पाइप लाइनों को जब्त करने के साथ ही जल संस्थान के एई प्रेमजी श्रीवास्तव ने मेला क्षेत्र में विभाग द्वारा की जा रही जलापूर्ति की भी जांच की। एई ने बताया कि विभाग द्वारा सप्लाई किया जा रहा पानी क्लोरीनयुक्त मिला है।