पाटी (चंपावत)। पाटी क्षेत्र में लोग पेयजल किल्लत से जूझ रहे हैं। पानी की अनियमित आपूर्ति की वजह से लोग नौले और हैंडपंपों से पानी ढोने के लिए मजबूर हैं। जल संकट से जूझ रहे ग्रामीणों ने मंगलवार को खाली बर्तनों के साथ प्रदर्शन किया।
पाटी ब्लॉक में रोजाना 17.90 लाख लीटर पानी की जरूरत है, लेकिन इसके सापेक्ष नई योजना के बावजूद 10.76 लाख लीटर पानी ही मिल पा रहा है। पाटी मुख्यालय क्षेत्र की हालत और भी बदतर है। यहां बमुश्किल 45 प्रतिशत पानी मिल पा रहा है। नई योजना के एक पंप में आई खराबी से भी दिक्कत बढ़ी है। मस्टा मंदिर कॉलोनी, स्टेशन चौराहा, माराकुली, पूनाकोट, जौलामेल, न्यू कॉलोनी, एसबीआई के नजदीक के क्षेत्रों में पेयजल किल्लत सबसे ज्यादा है। नागरिकों का आरोप है कि पेयजल वितरण में गड़बड़ी की वजह से कई जगह बेहद कम पानी मिल रहा है। इस वजह से लोग हैंडपंप और नौलों पर आश्रित हैं। लेकिन अधिक दबाव से स्टेशन चौराहे का हैंडपंप भी खराब हो गया है। नागरिकों ने प्रदर्शन कर जल्द आपूर्ति सुचारु न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। प्रदर्शन करने वालों में तारा सिंह कुंवर, दिनेश कुंवर, दिनेश भट्ट, केशव जोशी, कुशल सिंह, किशन, कल्लू, महेंद्र सिंह, हीरा सिंह, राजू, सागर पाटनी आदि शामिल थे। उधर जल निगम के जेई महेंद्र सिंह का कहना है कि पंप की खामी को दूर करने के साथ ही वितरण व्यवस्था को ठीक कर आपूर्ति सुचारु की जाएगी।
20 मई से होगी क्वैराला पंपिंग योजना से पेयजल आपूर्ति!
चंपावत। क्षेत्र की प्यास बुझाने वाली क्वैराला पंपिंग योजना के सफल रही शुरुआती ट्रायल के बाद जल निगम लोगों को जल्द पेयजल आपूर्ति करने की कवायद कर रहा है। डीएम नरेंद्र सिंह भंडारी ने जल निगम के अधिकारियों से योजना के ट्रायल की शुरुआती जानकारी लेने के बाद इसके जल्द संचालन के निर्देश दिए। ताकी भीषण गर्मी में शहर के लोगों को पर्याप्त पानी मिल सके। निगम के ईई वीके पाल का कहना है कि निगम का प्रयास 20 मई से पेयजल आपूर्ति करने का है।
पिछले माह 20 अप्रैल से ट्रायल शुरू होने के बाद योजना का पानी पहली मई को हिंग्लादेवी हेड टैंक तक पहुंच चुका है। हालांकि अभी पानी मटमैला है। करीब 17 किमी लंबी लाइन में पानी पहुंचने में 11 दिन लगे। शुरुआती ट्रायल में आई सभी खामियों को दूर करने का दावा भी किया गया है। एक साल तक इस योजना का संचालन जल निगम करेगा। करीब 30.88 करोड़ रुपये की चंपावत पुनर्गठन पेयजल योजना (क्वैराला पंपिंग योजना) से 30 वर्षों तक 29 हजार लोगों की प्यास बुझेगी।