शहर से हर रोज निकलने वाले तीन टन जैविक और अजैविक कूड़े के निस्तारण की ठोस व्यवस्था जिला बनने के 20 साल बाद भी नहीं हो पाई है। शहर का कूड़ा अभी भी खेतीखान मार्ग को जाने वाली सड़क के किनारे वन पंचायत की जमीन पर फेंका जा रहा है। वह भी वन पंचायत की अनुमति के बगैर। इस कूड़े के चलते यहां से लोगों की आवाजाही में दिक्कतें हो रही है। इससे पेयजल स्रोत पर भी खतरा बढ़ रहा है।
मानवाधिकार ने करीब एक साल पहले जिला प्रशासन को कूड़े के निस्तारण के लिए ट्रंचिंग ग्राउंड की जमीन तलाशने के निर्देश दिए थे। इसे लेकर प्रयास भी किए गए, मगर कूड़ा फेंकने के लिए जमीन अभी तक नहीं मिल सकी। ट्रंचिंग ग्राउंड के निर्माण को जमीन नहीं मिलने से खेतीखान मार्ग में सर्किट हाउस के समीप खुले में कूड़े का निस्तारण किया जा रहा है। इसकी सड़ांध से लोगों को काफी दिक्कतें हो रही हैं। खुले में पड़ी पॉलिथीन जानवरों की जिंदगी पर भी भारी पड़ रही है। चिकित्सकीय कचरे (बायो मेडिकल वेस्ट) के अलग से निस्तारण की भी कोई व्यवस्था नहीं है।
काेट
चंपावत में अभी ट्रंचिंग ग्राउंड की व्यवस्था नहीं है। नगर क्षेत्र का सारा कूड़ा इस वक्त खेतीखान मार्ग के किनारे सेलाखोला वन पंचायत की जमीन में फेंका जा रहा है। ट्रंचिंग ग्राउंड के मामले में प्रशासन, नगर पालिका और सेलाखोला वन पंचायत की जल्द बैठक कर अंतिम रूप दिया जाएगा।
अभिनव कुमार,
अधिशासी अधिकारी,
नगर पालिका, चंपावत।
बगैर अनुमति फेंका जा रहा कूड़ा:सरपंच
सेलाखोला वन पंचायत के सरपंच कैलाश अधिकारी का कहना है कि शहर के कूड़े को उनकी वन पंचायत में वर्षों से फेंका जा रहा है। पंचायत ने अनेकों बार आपत्ति भी की, मगर पंचायत से अनुमति तक नहीं ली गई है। लगातार कूड़ा फेंके जाने से यहां बांज के जंगल भी खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने कहा कि बृहस्पतिवार को होने वाली बैठक में कूड़े फेंके जाने से रोकने की दलील देंगे।
सुबह घूमने वालों की दिक्कतें बढ़ रही हैं
स्थानीय नागरिक मनोज नेगी का कहना है कि पर्यावरण से आसपास के इलाके में दुर्गंध बढ़ रही है। यहां फेंकी जाने वाली पॉलिथीन से पौध का विकास रुक रहा है। साथ ही सुबह सैर करने वालों की परेशानी भी बढ़ रही है।