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यहां वार्डब्वाय कर रहा मरीजों का इलाज

Wed, 07 Dec 2016 09:04 PM IST
हयात राम/अमर उजाला, चंपावत/श्रीरीठा साहिब
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वार्डब्वाय कर रहा मरीजों का इलाज - फोटो : अमर उजाला
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लधिया घाटी क्षेत्र के सबसे बड़े अस्पताल में मरीज इलाज को तरस रहे हैं। यहां न डॉक्टर हैं और न फार्मेसिस्ट। यहां तक कि मरीजों का इलाज यहां तैनात इकलौता कर्मी (वार्डब्वाय) कर रहा है। स्टाफ की कमी से मरीजों को वक्त पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। 
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लधिया घाटी के सबसे बड़ा अस्पताल (अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) श्रीरीठा साहिब में है, लेकिन इस अस्पताल में मरीजों को इलाज की सुविधा नहीं मिल पा रही है। लंबी दूरी तय कर आने वाले ग्रामीण मायूस लौटने को मजबूर हैं। अस्पताल में एक भी डॉक्टर नहीं है। इस साल जनवरी में संविदा डॉक्टर को तैनात किया गया, मगर कुछ दिनों के बाद डॉक्टर को यहां से दूसरे अस्पताल में संबद्ध कर दिया गया। बची कसर नवंबर में यहां तैनात एक आयुर्वेदिक डाक्टर एलके भट्ट को बागेश्वर जिला तबादला कर अस्पताल को पूरी तरह डॉक्टर विहीन कर दिया गया।

आमतौर पर यहां का अस्पताल फार्मेसिस्ट पर आश्रित है, लेकिन फार्मेसिस्ट दीपक गिरि के अवकाश में होने से अस्पताल में एकमात्र वार्डब्वाय रह गए हैं। बुधवार को श्रीरीठा साहिब से करीब सात किलोमीटर दूर वारसी ग्राम पंचायत से आई महिला पुष्पा जोशी का इलाज वार्डब्वाय दिनेश कुमार ने ही किया। इस अस्पताल से लधिया घाटी की 11 ग्राम पंचायतों का इलाज होता है। मगर पदों की कमी से हालत बदतर हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल के नाम पर यहां बड़ी इमारत तो है, लेकिन इलाज के नाम पर कुछ भी सुविधा नहीं है। लोगों ने जल्द से जल्द यहां स्टाफ की तैनाती की मांग की है।
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सात दिन में आए 149 मरीज
श्रीरीठा साहिब के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों की आमद तो होती है, लेकिन उन्हें इलाज नहीं मिल पाता है। दिसंबर के पहले सात दिनों मेें 149 मरीज अस्पताल आए। जबकि नवंबर में ओपीडी में 425 मरीज आए।

श्रीरीठा साहिब अस्पताल में कुछ समय पहले संविदा डॉक्टर की तैनाती की गई थी, लेकिन उनके गैर हाजिर रहने से अस्पताल डॉक्टर विहीन हो गया। जिले में ही डॉक्टरों के करीब 45 प्रतिशत पद रिक्त है। फिर भी यहां डॉक्टर की तैनाती के लिए प्रयास किए जाएंगे।
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- डा.डीएल साह, मुख्य चिकित्साधिकारी, चंपावत।
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