श्रीरीठा साहिब के बैंक में खत्म हुई नगदी
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जिले के बैंकों में नगदी का संकट बढ़ने लगा है। श्रीरीठा साहिब के पंजाब एंड सिंध बैंक में कैश खत्म हो गया है। बैंक ने बाकायदा इस संबंध में सूचना चस्पां कर दी है। बैंक के शाखा प्रबंधक केएस भंडारी का कहना है कि कैश चेस्ट से लगातार संपर्क किया जा रहा है। मगर धन नहीं मिल रहा है। बैंक ने 10 दिन में 30 लाख रुपए वितरित किए हैं, लेकिन लोगों द्वारा रुपए जमा नहीं कराए जाने से संतुलन बिगड़ रहा है। बैंक में रुपए नहीं होने से लधिया क्षेत्र में लोगों को दुश्वारी भी हो रही है।
उधर जिला मुख्यालय में भी नगदी का संकट बढ़ने लगा है। पिथौरागढ़ जिला सहकारी बैंक की शाखा को बुधवार को कैश चेस्ट से महज 2.5 लाख रुपए ही मिल सके, जबकि उसे कम से कम 10 लाख रुपए चाहिए थे। बैंक लोगों को अमूमन 10 हजार रुपए से अधिक नहीं दे रहे हैं। उद्यमी महेश चौड़ाकोटी को कारोबारी को देने के लिए 24 हजार रुपये चाहिए थे, मगर सवा घंटे तक लाइन में लगने के बाद उन्हें मिले महज 10 हजार। ऐसी नौबत अन्य तमाम ग्राहकों के साथ भी आई।
एसबीआई की चंपावत शाखा के मुख्य प्रबंधक हीरा सिंह पांगती का कहना है कि समस्या को देखते हुए आरबीआई से कैश की मांग की गई है। नगदी मिलने के बाद हालात सामान्य हो सकेंगे। श्री पांगती का कहना है कि बैंक अब अपने स्तर से लोगों को अधिक से अधिक ई-बैकिंग और डिजिटल बैंकिंग से जोड़ने के लिए प्रेरित कर रहा है। वहीं बुधवार को भी सात एटीएम से रुपये नहीं निकले। अलबत्ता एसबीआई के एक एटीएम से 100 रुपये के नोट भी निकले। जबकि बीते दो दिनों से अधिकांश एटीएम से सिर्फ 2000 का नोट निकल रहा था। उधर भिंगराड़ा में पैरा लीगल वालंटियर उमेश भट्ट बैंक संबंधी फार्म भरने में लोगों की मदद कर रहे हैं।
बैंकों से छोटी करेंसी न मिलने से बढ़ी दिक्कतें
यहां अधिकांश बैंकों से छोटी करेंसी नहीं मिलने से लोगों को दिक्कतें हो रही हैं। एटीएम से दो हजार रुपये का नोट निकलने के कारण इससे कम भुगतान वाले लोगों को निराश होना पड़ रहा है। बुधवार को डाक बंगला रोड और मीना बाजार स्थित एसबीआई के एटीमएम में कैश निकालने के लिए लोगों की लाइन लगी रही। एसबीआई, पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, नैनीताल बैक, अल्मोड़ा अर्बन बैंक, उत्तरांचल ग्रामीण बैंक, डाकघर में कैश की उपलब्धता के आधार पर लगातार उपभोक्ताओं को भुगतान किया जा रहा है। एसबीआई के शाखा प्रबंधक डमर सिंह पतियाल का कहना है कि एक व्यक्ति को सप्ताह में 24 हजार रुपये का भुगतान किया जा रहा है।