आखिर पांच दशक बाद हुए लिखित समझौते के बाद क्षेत्र के तीन ग्रामवासियों को राहत मिली है। ग्रामीण सीमा पर स्थित सेना के गेट ग्रामीणों के लिए प्रात: से देर रात्रि तक खुले रहेंगे। सुरक्षा और चौकसी के मद्देनजर गेटों पर सेना के जवान तैनात रहेंगे। किसी अनजान, संदिग्ध व्यक्ति को गेट से छावनी क्षेत्र में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। ग्रामीणों ने फैसले का स्वागत कर सेना, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का आभार जताया।
रविवार को सेना छावनी में 23 मराठा लाइट इंफैंट्री यूनिट के सीओ कर्नल कुलदीप कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में ग्रामीणों की समस्याओं का निराकरण किया गया। अंबेडकर ग्राम फागपुर, चंदनी और सैलानीगोठ के ग्रामीणों की रास्तों की समस्याओं का समाधान कर दिया गया। आए दिन सेना द्वारा ग्रामीण संपर्क मार्ग समय-समय पर सेना द्वारा बंद करने से ग्रामीण खासे परेशान थे। बैठक में सेना और ग्रामीणों के बीच तय हुआ कि फागपुर के दोनों गेट प्रात: से देर रात्रि तक खुले रहेंगे।
चंदनी के ग्रामीण भी अब बेरोकटोक महाराणा प्रताप गेट से गांव को आवाजाही कर सकेंगे। खिलबितिया जाने वाले मार्ग के गेट को ग्रामीणों की पूर्व सूचना पर खोला जाएगा। सैलानीगोठ से रेलवे पटरी तक और छावनी तक के मार्ग के जीर्णोद्धार पर सहमति बनी। गेट खोलने के समय सेना पूरी चौकसी और सतर्कता बरतेगी। अनजान, संदिग्ध और बाहरी लोगों का ग्रामीण क्षेत्र के गेटों से छावनी में प्रवेश पर रोक रहेगी।
गेट खुलने से सैनिक स्कूल, केवि, ईसीएचएस जाने वाले ग्रामीणों को राहत मिलेगी। चंदनी, फागपुर, सैलानीगोठ के ग्रामीणों ने फैसले का स्वागत किया है। बैठक में कै. सत्येंद्र सिंह, एसडीएम एनसी दुर्गापाल, पूर्वी तराई वन प्रभाग खटीमा के रेंजर सुरेश चंद्र मैंदोला, राज्य सिंचाई सलाहकार समिति सदस्य देवेंद्र गुरूंग, जिला पंचायत सदस्य ऊषा गुरूंग, उर्मिला चंद, ग्रामप्रधान गीता देवी, गंगा गुरूंग, बसंत राय, वार्ड सदस्य मुकेश राय, लक्ष्मी देवी, कैलाश विश्वकर्मा, मंजू देवी आदि मौजूद थे।