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कंटेनमेंट जोन चैकुनीबोरा के ग्रामीणों ने नाली में फेंका दूध

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चंपावत के चैकुनीबोरा गांव में दूध को फेंकते ग्रामीण। इस गांव को कोरोना के खतरे के मद्देनजर फिलहा? - फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते कंटेनमेंट जोन बनाए गए चैकुनीबोरा गांव के लोगों ने रविवार को 295 लीटर दूध नालियों में बहा दिया। ग्रामीणों का कहना है कि आवाजाही में लगे प्रतिबंध से हो रहे नुकसान के चलते यह कदम उठाया गया। विरोध के इस तरीके से गांव के लोगों को नौ हजार रुपये का चूना लगा है।
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नगर से छह किमी दूर चैकुनीबोरा गांव के 62 परिवारों की आमदनी का प्रमुख व्यवसाय दुग्ध उत्पादन है। लेकिन पिछले 12 दिनों से आवाजाही पर लगे प्रतिबंध की वजह से दूध की बिक्री सहित सारी गतिविधियां ठप हैं। इसका सबसे ज्यादा नुकसान दुग्ध उत्पादकों को हो रहा है। उनका करीब 300 लीटर दूध बिक्री को नहीं जा पा रहा है। पूर्व ग्राम प्रधान महेश महर और मनीष महर ने बताया कि पंचायत के दुग्ध उत्पादकों का दूध न तो दुग्ध संघ की समिति जा पा रहा है और न ही गांव से बाहर दुकानों तक पहुंच रहा है। इससे नाराज लोगों ने विरोध जताने का ये तरीका अपनाया। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के लोगों की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी निर्धारित वक्त पूरा होने से पहले उन्हें न तो दूध बेचने दिया जा रहा है और गांव से बाहर भी जाने नहीं दिया जा रहा है। ग्रामीणों ने जल्द प्रतिबंध हटाने के साथ मुआवजा देने का प्रशासन से आग्रह किया। दूध फेंकने व प्रदर्शन करने वालों में महेंद्र सिंह, नैना देवी, गोविंदी देवी, हीरा देवी, प्रकाश सिंह, ममता देवी, जोत सिंह, जगत सिंह, जवाहर सिंह, सुनीता देवी, किरन, दुर्गा देवी, जीवंती देवी, नवीन सिंह, महेश सिंह, भीम सिंह, मोहन सिंह, राजेंद्र सिंह, सुनीता बोहरा, करन सिंह आदि शामिल रहे।
12 दिन में 1.08 लाख का नुकसान
चंपावत। दुग्ध संघ के प्रबंधक राजेश मेहता का कहना है कि 22 ग्रामीण दुग्ध समिति में 81 लीटर दूध देते हैं। फिलहाल कंटेनमेंट जोन के चलते यह दूध बंद है। इसके अलावा करीब 40 लोग दुकानों व खुले बाजार में 214 लीटर दूध की बिक्री करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि 12 दिन से दूध की बिक्री बंद होने से उन्हें एक लाख रुपये से अधिक का नुकसान हो गया है।
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चैकुनीबोरा गांव के जो लोग दूध को दुग्ध समिति में देते हैं, उन्हें मदद दिलाने का प्रयास किया जाएगा। नुकसान की भरपाई के लिए दुग्धसंघ के बोर्ड में चर्चा कर निर्णय लिया जाएगा।
पार्वती जोशी,
अध्यक्ष, दुग्ध संघ, चंपावत।
कंटनमेंट जोन से किसी भी सामग्री को दूसरी जगह लाने से कोरोना का खतरा हो सकता है। इसलिए चैकुनीबोरा गांव से दूध, सब्जी या किसी तरह की सामग्री को दूसरी जगह ले जाने की इजाजत नहीं दी गई है। अलबत्ता जरूरत होने पर ग्रामीणों को प्रशासन की ओर से जरूरी सामग्री मुहैय्या कराई जा सकती है।
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सुरेंद्र नारायण पांडेय,
डीएम, चंपावत।
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