चंपावत। वर्ष 1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर शानदार विजय के 50 वर्ष होने पर निकाली जा रही स्वर्णिम विजय मशाल सोमवार को चंपावत पहुंची। बीती 16 दिसंबर को विजय दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री ने दिल्ली से यह मशाल रवाना की थी। शहीद स्मारक स्थल पर हुए कार्यक्रम में पुलिस और सैन्य अधिकारियों ने मशाल का पुष्पचक्र चढ़ाकर स्वागत किया।
मुख्य अतिथि एसपी लोकेश्वर सिंह ने कहा कि स्वर्णिम विजय मशाल कार्यक्रम 1971 के जंग में सेना के पराक्रम की याद दिलाता है। इस मौके पर 1971 के युद्ध में शहीद सैनिकों की वीरांगनाओं को सम्मानित भी किया गया। संक्षिप्त कार्यक्रम में पूर्व सैन्य अधिकारियों ने 1971 के युद्ध के शौर्य के संस्मरण सुनाए।
मशाल को एसपी समेत कर्नल आशीष रंजन, मेजर पुनीत, सेवानिवृत्त स्क्वाड्रन लीडर एमसी शर्मा, आईटीबीपी कमान अधिकारी बसंत कुमार, एसएसबी के कमान अधिकारी प्रमोद देवराड़ी, एडीएम टीएस मर्तोलिया, सीओ ध्यान सिंह, पूर्व जिला सैनिक कल्याण अधिकारी एमएस जोधा ने सलामी दी। वर्ष 1971 की जंग में शहीद हुए चामी के जोध सिंह की पत्नी गंगा देवी, केशव दत्त की पत्नी पदमा देवी के अलावा जनवरी 2020 में पुलवामा में शहीद हुए राहुल रैंसवाल की वीरांगना प्रीति रैंसवाल को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में 1971 की जंग में शिरकत करने वाले सेवानिवृत्त स्क्वाड्रन लीडर एमसी शर्मा, केशर सिंह, किशन राम, मोती राम आदि थे। बाद में मशाल पिथौरागढ़ रवाना हो गई।
ताजी हुईं पांच दशक पुरानी यादें...
चंपावत। वर्ष 1971 के युद्ध में शहीद हुए चामी-चौमेल के सैनिक जोध सिंह की वीरांगना गंगा देवी और शहीद केशव दत्त की पत्नी पदमा देवी ने स्वर्णिम विजय मशाल देखी, तो 50 साल पुरानी यादें ताजा हो गईं। दोनों वीरांगनाओं का इस कार्यक्रम में सम्मान किया गया। गंगा देवी बताती हैं कि जब पति ने देश के लिए जान कुर्बान की, तब वह 18 साल की थी। अलबत्ता आज उनकी आंखों के सामने धूमिल पड़ी चुकीं पुरानी यादें एक बार फिर तैरने लगी हैं। कहती हैं कि पहली बार मिले इस सम्मान से ऐसा लगा कि उनकी भी सुध लेने वाला कोई है। अब 68 साल की गंगा देवी अपनी छोटी बहन के साथ लोहाघाट में रहती हैं। वहीं आठ कुमाऊं बटालियन में ड्यूटी के दौरान देश के लिए जान देने वाले कमैला के केशव दत्त की पत्नी पदमा देवी के लिए ये भी खास मौका था। उनका कहना था कि पति की शहादत के 50 साल बाद बाद सेना से मिले सम्मान से उन्हें लगा कि सेना और सरकार को अब भी उनकी याद है। पदमा अपने भतीजों के साथ रह रही हैं।
1971 की जंग में शहीद हुए थे चंपावत जिले के ये 13 सैनिक
कैप्टन उमेद सिंह माहरा, चामी-चौमेल के सिपाही जोध सिंह, कलीगांव के सिपाही प्रताप सिंह, छंदा रेगड़ू के सिपाही शिवराज सिंह, कमैला के सिपाही केशव दत्त, ज्वाला दत्त, मल्लाकोट के नायक मान सिंह, मल्लाढेक के सिपाही ज्ञान सिंह, भाटीगांव के पायनियर रेवाधर, बुंगली के सिपाही हीरा चंद, रमैला के सिपाही हयात सिंह, सौंज के सिपाही केदार दत्त और मुड़ियानी के सिपाही प्रहलाद सिंह।