फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बजट ऐसा हो कि बढ़ सके रोजगार, घट सके महंगाई

विज्ञापन
चंपावत के सूचना सभागार में अमर उजाला संवाद के तहत बजट पर विचार रखते लोग। - फोटो : CHAMPAWAT
विज्ञापन
अमर उजाला संवाद में विभिन्न वर्गों के लोगों ने मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के बजट को लेकर अपेक्षाओं पर चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि बजट ऐसा हो जिससे रोजगार के अवसर बढ़ें और महंगाई से राहत मिले।
विज्ञापन

शुक्रवार को सूचना विभाग के सभागार में ब्लॉक प्रमुख रेखा देवी की अध्यक्षता और जिला सूचना अधिकारी एनएस बिष्ट के संचालन में हुए अमर उजाला संवाद में बजट को लेकर समाज के विभिन्न वर्गों की अपेक्षाओं पर लोगों ने बेबाकी से राय रखी। कहा कि मंदी और डगमगाती अर्थव्यवस्था को इस बजट से सहारा मिले। जिले में बनने वाले पंचेश्वर बांध के लिए बजट का प्रावधान किया जाए।
वक्ताओं ने कहा कि बजट के जरिए महंगाई की मार कम हो। इस दौरान रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए ठोस उपाय करने, स्वास्थ्य की गुणवत्तायुक्त सेवाओं को हर जिले तक पहुंचाने के प्रावधान पर चर्चा हुई।
विज्ञापन

वक्ताओं ने कहा कि कृषि प्रधान देश में विकास तब तक मुमकिन नहीं है जब तक खेती और खेतिहर पर ध्यान न दिया जाए। किसानों को मजबूत करने के लिए उनकी आय बढ़ाने के सूत्र और फसल का नुकसान होने पर मुआवजे की व्यवस्था को न्याय पंचायत स्तर पर लागू करने के सुझाव दिए गए। लोगों का कहना था कि उनकी जिंदगी और रोजमर्रा के हालात बेहतर बनाने में बजट अपनी छाप छोड़े।
वहां डीएसओ आरएस धामी, डिप्टी डीएसओ चंदन सिंह बिष्ट, कृषि विशेषज्ञ व सुविधा संस्था के राजीव उप्रेती, राज्य आंदोलनकारी मंदीप ढेक, एडवोकेट अशोक चौधरी, मजदूर नेता सूरज बोहरा, उद्यमी महेश चौड़ाकोटी, वीरेंद्र सिंह, उमेश शर्मा, पूरन बड़ोला, मंजू बिष्ट, सुरेश चंद्र, चंद्रशेखर ओली, प्रहलाद सिंह मौजूद थे।
देश की आधी आबादी महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता मिले। इसके लिए सीसीटीवी, महिला सुरक्षा कर्मियों की संख्या पर अधिक बजट खर्च हो। साथ ही बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। रेखा देवी, ब्लाक प्रमुख, चंपावत।
सरकारी रोजगार की संभावनाएं लगातार कम हो रही हैं। इसके विकल्प के रूप में स्वरोजगार को उभारा जाए। इसके लिए तकनीकी शिक्षा पर फोकस किया जाए ताकि लोग खुद हुनरमंद हो दूसरे को रोजगार देने वाला बन सकें। एनएस बिष्ट, जिला सूचनाधिकारी।
केंद्रीय बजट में खेल का बजट बढ़ाया जाए। इसके लिए दीर्घकालिक नीति बनाया जाना जरूरी है। ताकि दूरदराज की प्रतिभाओं को प्रभावी मंच मिल सके। आरएस धामी, जिला क्रीड़ाधिकारी।
बजट में श्रमिकों पर पर्याप्त फोकस किया जाना चाहिए। उनकी सामाजिक व आर्थिक सुरक्षा पर ध्यान दिया जाए। केरोसीन जैसी जरूरी सुविधाएं सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिए फिर से दी जाएं। सूरज सिंह, अध्यक्ष, मजदूर संघ।
कृषि प्रधान देश में किसानों की खस्ताहालत में सुधार करने के लिए सिंचाई की सुविधा पर जोर देना होगा। पहाड़ में खेती के लिए चुनौती बन रहे जंगली जानवरों से निपटने की राह भी इस बजट में दिखाई दे। रोहित कार्की, किसान नेता।
उत्तराखंड के पर्वतीय हिस्से से पलायन की गति को कम करने के लिए लघु व कुटीर उद्योगों को पहाड़ के अनुकूल बनाया जाए। नए उद्यमियों को प्रशिक्षण व वित्त पोषण के साथ प्रोत्साहित करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं। महेश चौड़ाकोटी, उद्यमी।
केंद्रीय बजट में बहुउद्देश्यीय पंचेश्वर बांध के लिए बजट जारी किया जाना चाहिए। इस बांध के बनने से देश को सिंचाई और ऊर्जा का लाभ तो होगा ही, जिले की अर्थव्यवस्था को भी प्रत्यक्ष रूप से लाभ होगा। एडवोकेट अशोक चौधरी, अध्यक्ष, भेषज संघ।
केंद्रीय बजट के जरिए गुणवत्तायुक्त शिक्षा, स्वास्थ्य सहित बुनियादी ढांचे को सशक्त किया जाए। इन मदों में बजट को बढ़ाया जाए ताकि निम्न और मध्यम वर्ग की जेब पर मार न पड़ सके। मंदीप ढेक, राज्य आंदोलनकारी।
पहाड़ में खेतों की चकबंदी जरूरी है। बजट नकदी फसलों को बढ़ावा देने वाला हो। जैविक खेती, पशुपालन और सहकारिता की मदद से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ऊंचाई देने के लिए ठोस कदम उठाना जरूरी है। राजीव उप्रेती।
पहाड़ के लोग पर्यावरण के सही मायने में पहरूवे हैं। नदियों के संरक्षण और जंगलों को बचानेे में उनके योगदान को देखते हुए उत्तराखंड को वॉटर व ग्रीन बोनस का प्रावधान मौजूद बजट में हो। नवीन देउपा, पत्रकार।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें