चोटिल गाय को पट्टी बांधते धर्मेंद्र पाल।
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प्रेम करना इंसान की सबसे बड़ी खूबी है। अगर ये प्रेम बेजुबानों से हो तो कहना ही क्या! रेल पुलिस फोर्स (आरपीएफ) में उप निरीक्षक धर्मेंद्र पाल गो सेवा की मिसाल हैं। वह टनकपुर के पुराने तहसील भवन में बनाए गो सेवा केंद्र में दर्द से कराहती गायों की सेवा कर रहे हैं। हर माह 14 हजार रुपये खर्च करते हैं और गायों का इलाज करते हैं।
बरेली जिले के धौराटांडा के धिमनी गांव के मूल निवासी धर्मेंद्र पाल का ताल्लुक किसान परिवार से हैं। उनके पिता स्वर्गीय बुद्धसेन को खेती और पशुपालन से लगाव था। धर्मेंद्र ने कहा कि पिता से पशु प्रेम की सीख विरासत में मिली। वह दो दशक से पशु सेवा कर रहे हैं। चार साल पूर्व धर्मेंद्र का स्थानांतरण टनकपुर हुआ तो उन्होंने गोशाला बना सेवा का बीड़ा उठाया। केंद्र में 61 गायें हैं।
गायों के लिए चारा और दवाओं के लिए वह वेतन से 14 हजार रुपये खर्च करते हैं। जल पुलिस के जवान रवींद्र पहलवान और शैलेंद्र अग्रवाल भी हाथ बंटा रहे हैं। टनकपुर में ठीक नहीं होने वाली गायों का इलाज इज्जतनगर (बरेली) पशु चिकित्सा अनुसंधान केंद्र में कराया जाता है। गो सेवा केंद्र का दौरा कर पशुपालन मंत्री रेखा आर्या उनके काम को सराह चुकी हैं लेकिन सरकारी स्तर पर कोई मदद नहीं मिली। विधायक कैलाश गहतोड़ी और टनकपुर के एसडीएम उनकी सराहना कर चुके हैं। डीएम सुरेंद्र नारायण पांडेय ने कहा कि उनकी अद्भुत गो सेवा को देखते हुए उन्हें सम्मानित किया जाएगा।
वैलेंटाइन डे पर माता-पिता से भी करें प्यार
लोहाघाट। वैलेंटाइन डे सिर्फ प्रेमी जोड़ों के बीच के प्रेम का दिन नहीं है। वैलेंटाइन डे पर हम अपने माता-पिता, भाई-बहन को भी दिखा सकते हैं कि हम उनसे कितना प्रेम करते हैं। छात्र अमन मेहता का कहना है कि इस दिन को पुलवामा हमले में शहीदों की याद मे मनाया जाना चाहिए। वहीं वेद प्रकाश पांडेय ने इस दिन को मातृ पितृ सम्मान दिवस के रुप से मनाए जाने की पैरवी की। छात्रा पूजा मेहता और शैलजा तिवारी ने भी कहा कि इस दिन हमें माता पिता के निश्छल प्रेम को याद करना चाहिए।