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अनियोजित तरीके से चीरे जा रहे हैं पहाड़ों के सीने

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चंपावत जिले के महर पिनाना क्षेत्र में विधायक निधि से काटी जा रही सड़क। - फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। पर्वतीय क्षेत्रों में भले ही विकास के लिए सड़कों का जाल बिछाया जाना जरूरी है, लेकिन कई जगहों पर सड़क निर्माण के लिए अनियोजित तरीके से पहाड़ काटे जा रहे हैं। सड़क निर्माण में भारी भरकम मशीनों के अलावा विस्फोटकों का प्रयोग कर पहाड़ों को खोखला बनाया जा रहा है। इससे पर्यावरण भी प्रभावित हो रहा है।
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जिले में जहां विभिन्न निर्माणदायी विभागों की ओर से नियोजित तरीके से सड़कों का निर्माण किया जा रहा है, वहीं विधायक निधि से काटी जा रही सड़कों के निर्माण में मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। चंपावत विधानसभा क्षेत्र में विधायक निधि से अब तक 24 से अधिक सड़कें काटी जा चुकी हैं। इन सड़कों के निर्माण में न तो वन विभाग से अनापत्ति ली गई है और न ही सड़कों का समरेखण कराया है। संबंधित क्षेत्र के ग्रामीणों के अनापत्ति प्रमाणपत्र के आधार पर एक से दस किलोमीटर लंबाई तक की सड़कों का निर्माण जेसीबी के जरिये कटिंग करके किया जा रहा है। पर्यावरणविद कैलाश चंद्र तलनियां का कहना है कि विकास के लिए सड़कों का होना अनिवार्य शर्त है, लेकिन अनियोजित तरीके से सड़कों के निर्माण से वन एवं पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंच रहा है।
पंचायती वनों में सरपंचों की ओर से दी जाती है अनापत्ति
चंपावत। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण के लिए आरक्षित वन क्षेत्र को छोड़कर पंचायती वन क्षेत्र में सरपंचों की ओर से अनापत्ति दी जाती है। वन क्षेत्राधिकारी केआर टम्टा के अनुसार लोनिवि सहित अन्य निर्माणदायी संस्थाओं की ओर से सड़क निर्माण से पूर्व विधिवत वन अधिनियम संबंधी आपत्तियों का निस्तारण किया जाता है। लेकिन पंचायती वनों में अनापत्ति वन पंचायत सरपंचों की ओर से दी जाती है।
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