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अल्ट्रासाउंड मशीनें दो परीक्षण एक से भी नहीं

Fri, 05 Jun 2015 11:17 PM IST
ब्यूरो /अमर उजाला, चंपावत
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 जिला अस्पताल में दो-दो अल्ट्रासाउंड मशीनें होने के बाद भी परीक्षण नहीं हो पा रहा है। इस वजह से मरीजों को प्राइवेट क्लीनिकाें में परीक्षण कराने को जेब ढीली करानी पड़ रही है।
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अक्तूबर 2012 में शुरू जिला अस्पताल से अब तक मरीजों को आमतौर पर खास सहूलियतें नहीं मिल सकी हैं। डॉक्टराें के 26 पदों के सापेक्ष 13 की तैनाती है। वहीं वार्ड ब्वाय एक भी नहीं है। काम चलाने के लिए दो वार्डब्वाय अटैच किए गए हैं। डीएच में एक पुरानी अल्ट्रासाउंड मशीन है। इस मशीन से तो कोई परीक्षण नहीं हुआ।

अब 18 मई को 26.5 लाख रुपये लागत की नई मशीन अस्पताल पहुंची, लेकिन परीक्षण इस मशीन से भी अभी शुरू नहीं हो सका है, जबकि अस्पताल में रेडियोलोजिस्ट भी तैनात हैं। अल्ट्रासाउंड परीक्षण की जरूरत मुख्य रूप से पेट संबंधी रोगों और गर्भवती महिलाओं को पड़ती है। अस्पताल की मशीन के काम नहीं करने से परीक्षण के लिए मरीजों को प्राइवेट क्लीनिक दौड़ना पड़ रहा है।
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हवा में ही रहे सीएम के निर्देश
चंपावत। सितंबर 2014 को देहरादून में चंपावत विधानसभा क्षेत्र की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं को ठीक करने के निर्देश अफसरों को दिए थे, लेकिन 8 माह बाद भी ये निर्देश हवा हवाई ही हैं। जिला अस्पताल मरीजों को मरहम लगाने में नाकाम रहा है। 6.06 करोड़ की लागत से निर्मित इस अस्पताल में अल्ट्रासाउंड, ईसीजी जैसे सामान्य परीक्षण तक की सुविधा नहीं जुट सकी है और ये सुविधा शुरू हुई तो 60 बैड के अस्पताल में अभी 16 ही काम कर रहे हैं। विधायक हेमेश खर्कवाल का कहना है कि अस्पताल की व्यवस्था को ठीक करने के लिए पहल की जा रही है।
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