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उचौलीगोठ गांव को भी खतरा

Sat, 25 Jun 2016 10:13 PM IST
राजेश देउपा /टनकपुर (चंपावत)।
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उचौलीगोठ को भी खतरा - फोटो : अमर उजाला
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बरसात के मौसम में पिछले कुछ वर्षों से बाटनागाड़ का मलबा कहर बरपा रहा हैं। मां पूर्णागिरि मार्ग पर बरसात होते ही आवागमन ठप हो रहा है। अब तो यह उचौलीगोठ गांव के लिए खतरा बन रहा है। प्रशासन उक्त हिस्से में फ्लाईओवर या निदान के ठोस उपाय के प्रति उदासीन बना हुआ है। इससे भविष्य में बड़ी आपदा का कारण बनने की आशंका से इनकार नहीं किया जा रहा है।
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करीब एक दशक से श्यामलाताल के बिसौरिया की पहाड़ी से निरंतर मलबा बाटनागाड़ नाले में आ रहा है। यह मलबा पूर्णागिरि मार्ग के छह सौ मीटर के हिस्से को डैमेज कर सीधे शारदा में गिर रहा है। इस मलबे का असर नदी के रुख पर भी पड़ रहा है। 2013 की आपदा में जब पहाड़ से शारदा में आए जल सैलाब ने तबाही मचाई थी तो तब भी इस मलबे के कारण बूम के नीचे से नदी के रुख में बदलाव की बात कही गई थी। वर्तमान में बीते दिनों प्री मानसूनी बरसात के बाद से ही भारी मात्रा में बाटनागाड़ में पहाड़ी से मलबा आ रहा है, इससे बार-बार पूर्णागिरि मार्ग पर आवागमन प्रभावित हो रहा है। लोग जान-जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे है। 

इधर, सूत्रों ने बताया कि पांच साल पहले वन प्रभाग ने बाटनागाड़ नाले को चैनलाइज करने का प्रस्ताव भेजा था, जो अभी तक मंजूर नहीं हुआ है। इतना ही नहीं छह साल पहले सरकार ने फ्लाईओवर के प्रस्ताव पर भी विचार किया था, लेकिन कोई कार्रवाई अभी तक सामने नहीं आई है। जून से सितंबर तक हर साल बाटनागाड़ का मलबा पूर्णागिरि मार्ग पर अवरोध पैदा करता है। इतना ही नहीं पिछले कुछ वर्षों से मलबे का रुख उचौलीगोठ गांव की ओर भी हो रहा है।
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अब गांव से उसकी दूरी घटकर मात्र करीब तीन-चार सौ मीटर रहा गई है। हालांकि कुछ वर्ष पहले जब टनकपुर-जौलजीबी मार्ग काली के किनारे बनाने की कवायद हुई थी। उसमें आरंभ का टनकपुर से ठूलीगाड़ तक के हिस्सा करीब 12 किमी टू लेन का प्रस्ताव बना तो तब फ्लाईओवर के प्रस्ताव पर चर्चा हुई, लेकिन अब निर्माण कार्य अंतिम चरण में हैं, उक्त छह सौ मीटर में फ्लाई ओवर का प्रस्ताव भी सामने नहीं आया है। लोनिवि के अधिकारियों का कहना है कि बाटनागाड़ में जमा मलबे का निस्तारण का प्रस्ताव अवश्य बनाया गया था, लेकिन उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। इससे भविष्य में दिक्कत आने की संभावना से इनकार नहीं किया। बहरहाल, बाटनागाड़ में पहाड़ से आ रहे भारी मलबे पर अंकुश लगाने के प्रति शासन प्रशासन की उदासीनता जारी है। जो भविष्य में बड़ी आपदा का कारण बन सकता है।

छह सौ मीटर हिस्से में मलबा आने से संवेदनशील बना हुआ है। मलबा का निस्तारण आवश्यक है। पूर्व में टनकपुर-जौलजीबी मार्ग की कंसल्टेंसी को ठोस योजना के प्रस्ताव के लिए कहा गया था, लेकिन कोई प्रावधान नहीं किया गया है। - बीएस पोखरिया, जेई, लोनिवि, टनकपुर।
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