कोट अमोड़ी ग्राम पंचायत के सैंदर्क तोक के डूंगर देव की गाड़ी पटरी पर थी लेकिन एक हादसे ने उनकी जिंदगी में तूफान ला दिया। पहाड़ी से गिरने से पांव काम करने लायक नहीं रहे।
इलाज में छह लाख रुपये खर्च कर उनकी जिंदगी तो बच गई लेकिन रोडवेज में संविदा चालक की नौकरी हाथ से निकल जाने से परिवार में आर्थिक संकट आ गया। मुख्यमंत्री राहत कोष से अब तक मदद नहीं मिलने से परेशानहाल परिवार ने सोशल मीडिया के सहारे विधायक से भावुक गुहार लगाई है।
24 मई 2018 को पहाड़ी से खाई में गिरने से डूंगर देव के पांव और कमर की हड्डी टूट गई। कई सामाजिक संगठनों और लोगों के छह लाख रुपये के सहयोग से बरेली में हुए इलाज से उनका जीवन तो बच गया लेकिन वह काम करने लायक नहीं रहे।
पिता चिंतामणि का कहना है कि डूंगर सात सदस्यों के परिवार के लिए अकेला कमाने वाला था। अब घर की हालत बेहद दयनीय हो गई है। एक साल पूर्व सीएम राहत कोष के लिए आवेदन किया लेकिन अब तक मदद नहीं मिली। परिजनों ने सोशल मीडिया के जरिए विधायक से गुहार लगाई है। कहा कि आपने (विधायक ने) अनेकों गरीबों की मदद कर उनके जीवन में खुशियां लौटाई हैं। ऐसी ही उम्मीद वे भी करते हैं।
सीएम राहत कोष से डूंगर देव को जल्द ही मदद दिलाई जाएगी। अपने स्तर से भी उनकी सहायता करेंगे। आगे इलाज के लिए डूंगर देव जिस अस्पताल में जाएंगे, उसका खर्च उठाएंगे। कैलाश गहतोड़ी, विधायक, चंपावत।
बीपीएल क्रमांक, फिर भी सुविधाओं को तरसे दिव्यांग शर्मा
चंपावत। पाटी ब्लाक के खरहीं गांव के भैरवदत्त शर्मा दिव्यांग भी हैं और जरूरतमंद भी। उनके पास बीपीएल क्रमांक भी है लेकिन वह सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। शर्मा ने कहा कि उन्हें न आवास दिया जा रहा है और न ही उज्ज्वला योजना का लाभ मिल रहा है।
65 प्रतिशत दिव्यांग शर्मा को अपने पांच सदस्यों के परिवार के भरण पोषण के लिए एक हजार रुपये मासिक दिव्यांग पेंशन का आसरा है। अब सीडीओ टीएस मर्तोलिया ने दिव्यांग शर्मा को उनके हक दिलाने का आश्वासन दिया है। उनका कहना है कि उनके आवेदनों पर जल्द कार्यवाही करने के ब्लॉक को आदेश दिए जाएंगे।
सरकारी मदद को तरसते दुर्घटना में दिव्यांग हुए कोट अमोड़ी ग्राम पंचायत के डूंगर देव।- फोटो : CHAMPAWAT