उत्तराखंड में दो लाख निरक्षरों को अगले पांच साल में साक्षर करने के लिए केंद्र पोषित योजना के तहत 30 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं। यह अभियान चंपावत और ऊधमसिंह नगर समेत प्रदेश के पांच जिलों में 2026 तक चलेगा।
समग्र शिक्षा के अपर राज्य परियोजना निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती ने योजना के क्रियान्वयन के लिए निर्देश जारी किए है। प्रदेश में 2021 से 2026 तक की अवधि में केंद्र पोषित नवभारत साक्षरता कार्यक्रम चलाया जाएगा। इसके तहत ग्रामीण और शहरी निकाय क्षेत्रों के 15 वर्ष से अधिक उम्र के निरक्षर लोगों को साक्षर बनाया जाएगा। पहले चरण में इन लाभार्थियों के चिह्नांकन और डाटाबेस तैयार करने के लिए सर्वे मद के तहत 30 लाख रुपये पांचों जिलों को स्थानांतरित की गई है। तकनीकी और संस्थागत सहयोग के लिए जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में जिला साक्षरता केंद्र (डीसीएल) बनाया जाएगा।
मार्च अंत तक निरक्षर लाभार्थियों के चिह्नांकन के साथ ही योजना के क्रियान्वयन के लिए स्वयंसेवियों का भी चयन कर लिया जाएगा। स्वयंसेवक के रूप में छात्र-छात्राएं और अन्य स्वयंसेवकों (एनएसएस, एनसीसी, एनवाईकेएस और सेवानिवृत्त कार्मिक) को चयनित किया जाएगा। कक्षाओं के लिए पूर्व के साक्षर भारत कार्यक्रम के संसाधनों का उपयोग होगा। स्वयंसेवकों के चयन के बाद ही साक्षरता कक्षाओं का संचालन शुरू किया जाएगा।
जिला - साक्षर होने वालों की संख्या - आवंटित राशि (लाख रुपये में)
हरिद्वार : 79417- 11.91
यूएस नगर : 72851- 10.93
चंपावत : 8890- 1.33
टिहरी : 25372- 3.81
उत्तरकाशी : 13470- 2.02
कोट
पढ़ना, लिखना अभियान के तहत 15 साल से अधिक उम्र के लोगों को चिह्नित किया जा रहा है। निरक्षर लोगों को चिह्नित करने के साथ इन्हें पढ़ाने वाले स्वयंसेवकों का भी चयन किया जाएगा। इस योजना से चंपावत जिले के 8890 निरक्षर लोगों को साक्षर किए जाने का लक्ष्य है। - आरसी पुरोहित, सीईओ, चंपावत।