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11 साल बीते पर शुरू नहीं हुआ मां पूर्णागिरि धाम में दरार भरने का काम

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मां पूर्णागिरि धाम का मुख्य मंदिर जहां दरार से मंदिर की सुरक्षा को खतरा है। - फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत जिले के आस्था के प्रमुख धाम मां पूर्णागिरि मंदिर की चट्टानों में आई दरारों को भरने (रिस्टोरेशन) का काम बीते 11 वर्ष बाद भी नहीं हो सका है। दरार की वजह से इस एतिहासिक मंदिर की सुरक्षा को खतरा है।
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2008 के बाद मां पूर्णागिरि धाम के मुख्य मंदिर की पहाड़ी में कई जगह करीब पांच इंच चौड़ी दरार नजर आई थी। मां पूर्णागिरि की पहाड़ी में दरारों के कारणों को जानने के लिए भूगर्भशास्त्री और भूगर्भ तकनीकी विशेषज्ञों की सलाह लेने के बाद भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले उपक्रम वाप्कोस ने पूर्णागिरि पहाड़ी के ट्रीटमेंट की डीपीआर (विस्तृत प्रगति रिपोर्ट) तैयार की थी।
करीब 5500 फीट की ऊंचाई पर स्थित मां पूर्णागिरि धाम की दरारों को भरने के अलावा मुख्य मंदिर से 700 मीटर तक की दूरी के पैदल मार्ग की दो फीट की चौड़ाई को आठ फीट तक किया जाएगा। इसके बाद परियोजना क्रियान्वयन यूनिट (पीआईयू) के देहरादून स्थित मुख्यालय ने कई बार टेंडर भी लगाए लेकिन टेंडर नहीं हो सके हैं।
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मां पूर्णागिरि मंदिर के ट्रीटमेंट के लिए शासन स्तर से कुछ समय पूर्व 10.50 करोड़ की धनराशि अवमुक्त हो चुकी है। मां पूर्णागिरि धाम के मुख्य मंदिर के पास आई दरार को वाप्कोस आधुनिक तकनीक से भरेगी। मंदिर में ट्रीटमेंट के लिए कार्यदायी संस्था को पिछले साल पहले वन भूमि की अनापत्ति मिल चुकी है।
मां पूर्णागिरि पहाड़ी के ट्रीटमेंट के लिए परियोजना क्रियान्वयन यूनिट देहरादून में तकनीकी टेंडर हो चुके हैं। इसके बाद अब वित्तीय टेंडर लगाए जाएंगे। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद पूर्णागिरि की पहाड़ी के ट्रीटमेंट का काम शुरू हो जाएगा। अनुबंध गठित होने से 18 माह के भीतर इस काम को पूरा करना होगा। सुरेश चंद्र आर्या, अधिशासी अभियंता, विश्व बैंक निर्माण खंड, चंपावत।
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