खेल प्रतिभाओं के लिए चंपावत के दरवाजे बंद हो गए हैं। अब चंपावत में किसी भी खेल का प्रशिक्षण नहीं हो सकेगा। इसकी वजह खेलों का विभागीय आधारभूत ढांचा नहीं होना है।
चंपावत में पिछले साल तक हॉकी, क्रिकेट, फुटबॉल, बैडमिंटन, वॉलीबाल, एथलेटिक्स के प्रशिक्षण के लिए कैंप लगते थे। साल भर में दस माह तक लगने वाले इन कैंपों से खासकर बच्चों को खेलों में हुनरमंद बनने का मौका मिलता था लेकिन इस बार ये प्रशिक्षण बंद हो गए हैं।
चंपावत के अलावा लोहाघाट में भी कराटे को छोड़ शेष पांच अन्य खेलों के प्रशिक्षण पर ब्रेक लग गया है। इसी तरह ऊचौलीगोठ, गैड़ाखाली और बनबसा के मिनी स्टेडियम में भी खेल प्रशिक्षण पर रोक लग गई है। इस वजह से करीब 1100 खिलाड़ी खेल की बारीकियों को सीखने से वंचित हो गए हैं। वहीं इन खेलों के नहीं होने से इसका नुकसान 24 खेल प्रशिक्षकों को भी होगा। ये तमाम प्रशिक्षक अब बेरोजगार हो गए हैं। वैसे इस बार जिला योजना में खेल विभाग को कुल 52.36 लाख रुपये स्वीकृत हुए हैं।
टनकपुर में चल रहे हैं सात खेलों के प्रशिक्षण
चंपावत। खेल विभाग ने टनकपुर स्टेडियम में सात खेलों के प्रशिक्षण शुरू कर दिए हैं। जिला खेल अधिकारी आरएस धामी ने बताया कि टनकपुर में हॉकी, फुटबॉल, क्रिकेट, मुक्केबाजी, वॉलीबाल, ताइक्वांडो और बास्केटबॉल का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके अलावा लोहाघाट में कराटे का प्रशिक्षण शुरू किया गया है। आधारभूत ढांचा नहीं होने के बावजूद लोहाघाट के खिलाड़ियों की शानदार उपलब्धि के चलते कराटे के प्रशिक्षण को अनुमति दी गई है।
चंपावत की खेल गतिविधियां पिछले साल तक शिक्षा विभाग के गोरलचौड़ मैदान में होती थी। खेल विभाग का अपना मैदान नहीं होने से विभागीय आदेशों के क्रम में चंपावत में होने वाले प्रशिक्षण कैंप बंद कर दिए गए हैं। चंपावत के अलावा आधारभूत ढांचा नहीं होने वाले अन्य जगहों में भी खेल प्रशिक्षण कैंप बंद कर दिए गए हैं। अब टनकपुर में सात और लोहाघाट में एक खेल का प्रशिक्षण कैंप लग रहा है।
-आरएस धामी, जिला खेल अधिकारी, चंपावत।
राज्य बनने के बाद नहीं बना कोई स्टेडियम
चंपावत। उत्तराखंड बने 17 वर्ष से अधिक हो गए हैं लेकिन जिले में एक भी नया स्टेडियम नहीं बन सका है। चंपावत जिले का इकलौता स्टेडियम टनकपुर में है जिसका निर्माण उत्तर प्रदेश के दौर में हुआ था। वहीं लोहाघाट में स्टेडियम का काम बेहद धीमी गति से हो रहा है। तीन मुख्यमंत्रियों के एलान के बावजूद चंपावत में स्टेडियम नहीं बन सका है। इसके लिए जमीन की तलाश तक पूरी नहीं हो सकी है और इसका नुकसान खेल प्रतिभाओं को भुगतना पड़ रहा है।