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यातायात प्लान कारगर होता, तो नहीं होती 11 अकाल मौतें

Fri, 18 May 2018 11:30 PM IST
अमर उजाला ब्यूराे चंपावत।
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हाईवे पर घटना स्थल के पास खड़ा मौत बनकर दौड़ा डंपर। - फोटो : अमर उजाला
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 उप्र के नवाबगंज क्षेत्र के करीब 240  लोग मां पूर्णांगिरि धाम के दर्शन कर पुण्य पाना चाहते थे, लेकिन वे देवी के दरबार तक नहीं पहुंच सके। धाम से करीब 30 किमी पहले 11 लोगों की मौत हो गई। मोक्ष के बजाय उन्हें मौत मिली। मां पूर्णांगिरि धाम मेले में यात्रियों की सुरक्षा के लिए दावे तो खूब किए गए थे, मगर जमीन पर वे कहीं नजर नहीं आए। तीर्थयात्रियों की इन अकाल मौतों का जिम्मेदार आखिर कौन है?  
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मां पूर्णांगिरि धाम के यातायात प्लान को लेकर इस बार पुलिस ने खूब दावे किए। तीन मार्च से शुरू मां पूर्णांगिरि धाम के सरकारी मेले के लिए पहली बार यातायात व्यवस्था के लिए अलग पुलिस प्रबंध किया गया था। जिले के प्रवेशद्वार बनबसा से लेकर भैरव मंदिर तक के करीब 30 किलोमीटर भाग को तीन हिस्सों में बांटकर दरोगाओं को जिम्मा सौंपा गया था। बनबसा से ककरालीगेट तक, ककरालीगेट से ठुलीगाड़ तक और ठुलीगाड़ से भैरव मंदिर तक के मोटर मार्ग पर यातायात को सुव्यवस्थित करने के लिए तीन टीमें बनाई गई थी। पुलिस की इन तीन टीमों को जाम से बचाव से लेकर यातायात सुरक्षा व अन्य व्यवस्था करने का जिम्मा दिया था। साथ ही उत्तराखंड व यूपी के जिलों के पुलिस प्रमुख व उप महानिरीक्षकों को पत्र भेज ट्रैक्टर  व मालवाहक वाहनों से मां पूर्णांगिरि धाम आने वाले तीर्थयात्रियों को रोकने का आग्रह किया गया।  
मगर मेले में उमड़ी भारी भीड़ के दौरान ये व्यवस्थाएं कहीं नजर नहीं आई।

ओवरलोड वाहन नहीं रुके, तो  तेज गति पर भी कोई लगाम नहीं रही। यात्रियों को ढोने में लगी जीप व बसों से लेकर खनन में लगे डंपर व शक्तिमान तक अधिक से अधिक चक्कर लगाने के फेर में नियमों को ताक पर रखते रहे। पुलिस व परिवहन विभाग भी कार्रवाई के नाम पर बस आंकड़ों की खानापूरी में लगे रहे।  
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पदयात्रियों के लिए सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं  
कांवड़ लेकर हरिद्वार जाने वाले यात्रियों के लिए सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त होते हैं। उस दौरान हालात को देखते हुए यातायात की आवाजाही को भी रोका जाता है। मगर मां पूर्णांगिरि धाम में आने वाले पैदल तीर्थ यात्रियों के लिए सुरक्षा के ऐसे प्रबंध नहीं किए जाते हैं। भीड़ भरी सड़क से उनके गुजरने के दौरान भी वाहनों की आवाजाही को रोका नहीं जाता है। देवी मां के डोले लेकर आने वाले पैदल तीर्थ यात्री भी वाहनों की आवाजाही के बीच बचते-बचाते सड़क से आगे बढ़ते हैं।  
कोट  
तीर्थ यात्रियों सहित अन्य वाहनों की सुरक्षित आवाजाही के लिए बनाए गए प्लान को लागू करने में कोई गड़बड़ी नहीं थी। पुलिस ने परिवहन विभाग व प्रशासन के साथ मिलकर लगातार निगरानी कर व्यवस्था को बेहतर बनाने का प्रयास किया गया। फिर भी शुक्रवार को हुए हादसे के बाद यातायात व्यवस्था की फिर से समीक्षा की जाएगी।  
धीरेंद्र गुंज्याल,  
एसपी, चंपावत।
बाक्स  

कहीं बूम में उद्घाटन होने का नतीजा तो नहीं!  

चंपावत। मां पूर्णांगिरि धाम मेले का श्रीगणेश तीन मार्च को पहली बार मेले के बेस कैंप ठुलीगाड़ के बजाय बूम में हुआ। इसे लेकर धाम के काफी पुजारियों में नाराजगी भी रही। मेले के उद्घाटन से करीब एक घंटे पूर्व ही बिजली लाइन ठीक कर रहे एक कर्मी की मौत हो गई थी। अब दबी जुबान से कई लोग शुक्रवार सुबह हुए हादसे में 11 तीर्थयात्रियों के हताहत होने को इससे जोड़ कर भी देख रहे हैं। उनका कहना है कि पहली बार तीर्थयात्रियों के साथ हुए ऐसे भीषण हादसे के पीछे कहीं उद्घाटन स्थल बदलना कारण न हो।  

टनकपुर से 12 किमी दूर बेस कैंप ठुलीगाड़ में जिला पंचायत का मेला शिविर, मेला मजिस्ट्रेट कार्यालय, अस्थाई थाना, स्वास्थ्य कैंप आदि हैं। 2017 तक मेले का शुभारंभ नियमित रूप से ठुलीगाड़ में होता था। मगर सरकारी मेले के इतिहास में पहली बार 2018 में श्रीगणेश ठुलीगाड़ से करीब पांच किमी पूर्व बूम में बनाए गए पार्किंग स्थल में हुआ। इस शुभारंभ को लेकर धाम के काफी पुजारियों में नाराजगी थीं। मां पूर्णांगिरि मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष पंडित किशन तिवारी, नेत्र बल्लभ तिवारी, बिशन दत्त भट्ट आदि का कहना है कि ठुलीगाड़ मां पूर्णांगिरि की चरण स्थली है। पहले पड़ाव में देवी मां की पूजा-अर्चना करके ही मेले का श्रीगणेश करना धार्मिक मान्यताओं की दृष्टि से भी उचित रहता। 
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