सामान्य समीक्षा मिशन (सीआरएम) टीम ने दूसरे दिन भी जिला अस्पताल का मुआयना किया। अस्पताल में आए मरीजों, उनके तीमारदारों से यहां मिल रही सुविधाओं के बारे में जानकारी हासिल की। जिला अस्पताल में तमाम विभागों में मिल रही सुविधाओं को देखा। कमेटी नौ नवंबर के बाद विस्तृत रिपोर्ट उत्तराखंड शासन को भेजेगी, जहां से इस रिपोर्ट को केंद्र सरकार को भेजी जाएगी।
स्टेट हेड डॉ. विनोद टोलिया ने बताया कि मुआयने का मुख्य उद्देश्य अस्पतालों की कमियों को दूर कर सुविधाओं का विस्तार करना है। कहा कि ये मुआयना हर दो साल में किया जाता है। देश के 21 राज्यों में ये कार्यक्रम चल रहा है। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल में टीम ने प्रसव कक्ष, ओपीडी, आपातकालीन सेवा, दवाइयों के स्टोर, ब्लड बैंक में उपकरणों की उपलब्धता के बारे में जाना।
निदेशक डॉ. आलोक कुमार वर्मा के नेतृत्व में आई टीम में अंडर सेक्रेट्री डॉ. एस नायक, डॉ. रमन एनकरिअप्पा, डॉ. रवि कुमार, डॉ. हनी अरोड़ा और डॉ. विनय बत्रा शामिल हैं। वहां एसीएमओ डॉ. रश्मि पंत, सीएमएस डॉ. आरके जोशी थे।
लेबर रूम, अल्ट्रासाउंड कक्ष सहित शौचालयों का किया निरीक्षण
दिल्ली से आई सामान्य समीक्षा मिशन (सीआरएम) की टीम ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान टीम ने एनआरएचएम के तहत संचालित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी ली। इसके साथ ही उन्होंने रोगियों से भी अस्पताल में मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी ली।
सोमवार को डॉ. आलोक कुमार वर्मा के नेतृत्व में आई टीम को चिकित्साधीक्षक डॉ. वीके जोशी ने एनआरएचएम के तहत संचालित होने वाले कार्यक्रमों परिवार नियोजन, मलेरिया, डायरिया, अंधता निवारण, जननी सुरक्षा योजना, मातृ, शिशु, किशोर किशोरी स्वास्थ्य, संक्रामक, गैर संक्रामक रोगों से निपटने के लिए विभाग द्वारा करने वाले कार्यों की जानकारी दी।
सीएमओ डॉ. एमएस बोहरा ने चिकित्सकों, पैरा मेडिकल स्टाफ की उपस्थिति का जायजा लिया। इस दौरान एसीएमओ डॉ. रश्मि पंत, डीपीएम गौरव पांडेय, प्रेम भट्ट, सीएचसी के चिकित्साधीक्षक डॉ. वीके जोशी, बीपीएम राकेश पंत, एलडी जोशी, निर्मल मुरारी, हरिमोहन बोहरा, स्टाफ नर्स प्रमोद, विनोद उप्रेती मौजूद थे।
बदला बदला नजर आया सीएचसी का नजारा
सीआरएम टीम द्वारा लोहाघाट के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किए जाने की सूचना मिलने पर सोमवार को सीएचसी का सारा नजारा ही बदला-बदला नजर आया। अस्पताल परिसर में जहां विशेष स्वच्छता कर उसे चमकाया गया था, वहीं लेबर रूम आदि कक्षों में पर्दे लगाकर सजाया गया था। अस्पताल में जैविक, अजैविक कूड़े के निस्तारण के लिए अलग स्थानों में कूड़ेदान रखे गए थे।