चंपावत जिले सहित पूरे प्रदेश में 30 अक्तूबर से खसरा, रुबेला टीकाकरण चल रहा है। वहीं दूसरी तरफ जिले में सामान्य टीकाकरण तक की सुविधा नहीं है। एएनएम स्वास्थ्यकर्मी न होने से जिले के 28 मातृ शिशु एवं परिवार कल्याण उप केंद्र बंद हैं। 16 किमी पैदल दूरी वाले डांडा एएनएम केंद्र में डांडा, ककनई ग्राम पंचायत की गर्भवती महिलाओं, शिशुओं का टीकाकरण होता है, लेकिन वर्षों से इस केंद्र में एएनएम नहीं हैं।
ग्राम प्रधान खष्टी देवी बताती हैं कि चार माह बाद इस बार टीकाकरण हुआ है। डांडा के एएनएम केंद्र के कुछ कमरे में पुलिस चौकी है। जिले के 63 उप केंद्रों में से 28 में ऐसा ही हाल है। जिले के 63 उप केंद्रों समेत सात मुख्य केंद्र, दो अस्पतालों में एएनएम के कुल 80 पद हैं। मगर इनमें से तैनात महज 49 ही हैं। 28 उप केंद्र बंद हैं। वहीं बाराकोट मुख्य केंद्र में दो एएनएम में से एक ही तैनात है।
चंपावत महिला अस्पताल में भी एएनएम नहीं हैं। प्रेम सिंह आदि आदि ग्रामीणों का कहना है कि गर्भवती महिलाओं के लिए डिलीवरी की सुविधा तक नहीं है। नवजात के लिए महिलाओं, शिशुओं को 16 से 75 किमी दूर लोहाघाट, चंपावत, टनकपुर जाना पड़ रहा है।
जिले के इन 30 केंद्रों में एएनएम नहीं
चंपावत विकासखंड (11 केंद्र) : महिला चिकित्सालय चंपावत, मुख्य केंद्र मंच, उप केंद्र अमोड़ी, तामली, डांडा, धुरा, नरसिंहडांडा, भगानामेहरा, गुरौली, तरकुली, सिमियाउरी।
लोहाघाट विकासखंड (पांच केंद्र) : किमतोली, लूपड़ा, पुलहिंडोला, मडलक, मड़ुवा उप केंद्र।
पाटी विकासखंड (12 केंद्र) : मुख्य केंद्र पाटी, पनियां, मंगललेख, बिनवालगांव, मूलाकोट, मध्य गंगोल (जनकांडे), चौड़ाकोट, पीपलढींग, धूनाघाट, मुख्य केंद्र चौड़ामेहता, उप केंद्र चौड़ामेहता, सिमलखेत।
बाराकोट विकासखंड (दो केंद्र) : उप केंद्र मटियाल, रेगड़ू।
एएनएम के खाली पदों में नई नियुक्ति के लिए विभाग से आग्रह किया गया है। फिलहाल काम चलाने के लिए बंद एएनएम केंद्रों में आसपास की एएनएम को भेज टीकाकरण का काम चलाया जा रहा है। डांडा एएनएम केंद्र में लंबे समय से पुलिस चौकी चल रही है। फिलहाल डांडा में एएनएम नहीं है। फिर भी पुलिस विभाग से चौकी को दूसरे स्थान पर शिफ्ट करने के लिए पत्र भेजा जाएगा।
- डॉ. एमएस बोहरा, सीएमओ, चंपावत।