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टमाटर की मिहिर प्रजाति का केवीके में हुआ सफल परीक्षण

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लोहाघाट (चंपावत)। स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) में टमाटर की नई प्रजाति मिहिर का परीक्षण सफल रहा है। वैज्ञानिकों के करीब एक साल के परीक्षण में यहां की जलवायु में टमाटर की यह प्रजाति को कारगर रही। आगामी वर्षों से केंद्र के वैज्ञानिकों की ओर से इस प्रजाति का बीज और पौध स्थानीय किसानों को उपलब्ध कराए जाएंगे।
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छमनियां स्थित केवीके के प्रभारी अधिकारी डॉ. एमपी सिंह ने बताया कि केंद्र में टमाटर की नई हाइब्रीड मिहिर प्रजाति का परीक्षण किया गया। इसमें यहां की जलवायु के लिए यह प्रजाति कारगर साबित हुई है।
डॉ. सिंह ने बताया कि परीक्षण के तौर पर केंद्र में 200 वर्ग मीटर के पॉलीहाउस में टमाटर की मिहिर प्रजाति लगाई गई। इसमें अपेक्षा के अनुसार उत्पादन शुरू हो गया है। डॉ. सिंह ने बताया कि टमाटर की यह प्रजाति 80 दिन में तैयार हो जाती है। परीक्षण के दौरान एक पौध में करीब पांच से छह किलो टमाटर लगे।
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45 दिन में फल देगा मिहिर प्रजाति का टमाटर
लोहाघाट (चंपावत)। केवीके के वैज्ञानिक डॉ. एमपी सिंह ने बताया कि मिहिर प्रजाति के टमाटर की पौध को करीब 40 से 45 सेमी की दूरी पर लगाना चाहिए। पौध को एक फुट की ऊंचाई के बाद दो शाखाओं को ही ऊपर बढ़ने दिया जाना चाहिए।
इससे पौधे की लंबाई और उत्पादन भी बढ़ेगा। ऊपर बढ़ाने के लिए प्लास्टिक की रस्सी से सहारा दिया गया है। डॉ. सिंह ने बताया कि टमाटर की मिहिर प्रजाति का पौधा 45 दिन में फल देगा।
केंद्र में किया गया कीट रोगों का प्रबंधन
लोहाघाट (चंपावत)। केंद्र में टमाटर को कीटों और रोग से बचाने के लिए उसमें समय-समय पर एनपीके के घुलनशीन उर्वरक का घोल दो ग्राम एक लीटर पानी की दर से बनाकर पौधों की जड़ों में डाला जाता है। समय-समय पर झुलसा रोग एवं कीट रोगों का प्रबंधन किया गया।
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