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जिला ओडीएफ लेकिन ऐतिहासिक ऋषेश्वर मंदिर शौचालयविहीन

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शौचालयविहीन लोहाघाट का ऋषेश्वर महादेव मंदिर और धर्मशाला। - फोटो : LOHAGHAT
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चंपावत तीन वर्ष पूर्व ओडीएफ (खुले में शौच से मुक्त) जिला घोषित किया जा चुका है लेकिन जमीनी हकीकत इससे मेल नहीं खाती। यहां तक कि नगर के ऐतिहासिक ऋषेश्वर महादेव मंदिर और मंदिर की धर्मशाला में आने वाले अतिथियों को भी खुले में शौच से निजात नहीं मिल सकी है। यहां रहने वाले और आने वाले दोनों ही लोग लोहावती नदी के नजदीक शौच जाने को मजबूर हैं।
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लोहाघाट के ऐतिहासिक ऋषेश्वर महादेव मंदिर में एक अदद शौचालय तक नहीं है। ऋषेश्वर मंदिर कैलाश-मानसरोवर यात्रा पथ का हिस्सा भी रह चुका है। पौराणिक महत्व के इस मंदिर की मान्यता है कि कैलाश पर्वत जाते वक्त भगवान शिव लोगों को न्याय प्रदान करने के लिए अपने गण बैताल को यहां छोड़ गए थे।
मंदिर में हर साल भागवत पुराण, शिव पुराण, श्रीकृष्ण लीला सहित कई धार्मिक आयोजन होते हैं। इसके अलावा यहां संत, महंत, श्रद्धालुओं और अन्य अतिथियों के लिए धर्मशाला और हाल भी है। साल भर में एक लाख से अधिक लोगों की आवाजाही होती है लेकिन इस धर्मशाला में अतिथियों के लिए शौचालय की व्यवस्था तक नहीं है। यहां रहने वाले और आने वाले लोगों को खुले में शौच में जाने की मजबूरी है।
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मंदिर में शौचालय और मूत्रालय की व्यवस्था नहीं होने से श्रद्धालुओं को भारी परेशानी होती है। लोग खुले में शौच जाने को मजबूर हैं।
मठाधीश स्वामी मोहनतीर्थ, मठाधीश, ऋषेश्वर महादेव मंदिर।
ऋषेश्वर के ऐतिहासिक मंदिर की धर्मशाला में शौचालय जैसी जरूरी सुविधा की कमी तीर्थ यात्रियों की आस्था पर चोट है। प्रहलाद सिंह मेहता, अध्यक्ष, ऋषेश्वर महादेव मंदिर समिति।
ये मामला प्रशासन के संज्ञान में है। प्रशासन की ओर से शौचालय बनाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। जल्द ही मंदिर और धर्मशाला की जरूरत के अनुरूप शौचालय व मूत्रालयों का निर्माण करा दिया जाएगा। आरएस गौतम, एसडीएम, लोहाघाट
जिले में बनाए जा चुके हैं 49209 शौचालय
चंपावत। चंपावत जिले को स्वच्छता अभियान के संचालन में देशभर में 59वां व प्रदेश में चौथा स्थान मिला। स्वजल परियोजना के परियोजना निदेशक हरगोविंद भट्ट का कहना है कि 2012 के सर्वे के अनुसार जिले में 49209 परिवारों के लिए शौचालय बनाने का लक्ष्य नवंबर 2016 में हासिल हो गया था। इसके बावजूद जिले के गांव-दर गांव लोगों की लंबी फेहरिस्त आ रही है। उदाहरण के लिए खरही ग्राम पंचायत के 184 परिवार, मंगोली गांव के 31, रमैला गांव के 18, जौलाड़ी गांव के 13, रैघाड़ी के 9 परिवार और गूम गांव के 7 परिवारों के पास शौचालय नहीं है।
15 साल से बंद है रीठा साहिब का शौचालय
रीठा साहिब (चंपावत)। गुरुद्वारे के लिए विख्यात रीठा साहिब में 2003 में सार्वजनिक शौचालय बनाया गया था। 10 लाख रुपये से अधिक कीमत से निर्मित इस शौचालय का कभी उपयोग नहीं हो सका।
घटिया गुणवत्ता और विवाद के चलते मामले की कई बार जांच भी हुई। बाद में शौचालय निर्माण करने वाली कंपनी अपना ताला लगा कर चल दी। ग्रामीणों की ओर से कई बार इस मामले को उठाया भी गया लेकिन शौचालय उपयोग लायक नहीं हो सका।
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