तीन दिनों के सार्वजनिक अवकाश के बाद मंगलवार को बैंकों के खुलने पर कैश के लिए मारामारी रहने की संभावना है। भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य चेस्ट ब्रांच में अभी देहरादून से नई करेंसी नहीं पहुंची है। इस कारण चेस्ट बैंक से फीड अन्य बैंकों को पर्याप्त धनराशि जारी नहीं हो पा रही है। तीन दिनों के अवकाश के कारण जिला मुख्यालय के ज्यादातर एटीएम में कैश खत्म हो गया है। जो एक दो एटीएम चल भी रहे हैं तो वहां केवल दो हजार रुपए का एक नोट ही निकल रहा है। बाजार में 500 और 100 रुपए के साथ ही 50, 20 और दस-पांच के नोट नहीं मिलने से लोगों की दिक्कतें बढ़ने लगी हैं।
छोटे व्यापारी भी करने लगे हैं पेटीएम का प्रयोग
चंपावत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैशलेस इकानॉमी की घोषणा से प्रेरित होकर अब छोटे व्यापारी भी पेटीएम का प्रयोग करने लगे हैं। पुस्तक विक्रेता कैलाश चंद्र पांडेय का कहना है कि उन्होंने अपने आसपास के सभी दुकानदारों के पेटीएम एकाउंट बनाए हैं, इसमें किसी भी प्रकार की लेन देन आसानी से हो जा रहा है।
नेट बैंकिग सेवा लेने वालों की संख्या भी बढ़ी
चंपावत। नोटबंदी के बाद से ही जिले में नेट बैंकिंग सेवा को बढ़ावा देने की कोशिश तेज हो गई है। जिला लीड बैंक अधिकारी आनंद सिंह रावत के अनुसार इस दौरान नेट बैंकिंग सेवा के लिए आवेदन करने वालों की संख्या में खासा इजाफा आ रहा है। प्रतिदिन सौ से अधिक लोग नेट बैंकिंग के लिए विभिन्न बैंकों में आवेदन कर रहे हैं, जबकि पूर्व में यह संख्या इक्का दुक्का रहती थी।
एसबीआई में दून से नई करेंसी नहीं पहुंची
चंपावत। तीन दिनों के सार्वजनिक अवकाश के बाद मंगलवार को बैंकों के खुलने पर कैश के लिए मारामारी रहने की संभावना है। भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य चेस्ट ब्रांच में अभी देहरादून से नई करेंसी नहीं पहुंची है। इस कारण चेस्ट बैंक से फीड अन्य बैंकों को पर्याप्त धनराशि जारी नहीं हो पा रही है। तीन दिनों के अवकाश के कारण जिला मुख्यालय के ज्यादातर एटीएम में कैश खत्म हो गया है। जो एक दो एटीएम चल भी रहे हैं तो वहां केवल दो हजार रुपए का एक नोट ही निकल रहा है। बाजार में 500 और 100 रुपए के साथ ही 50, 20 और दस-पांच के नोट नहीं मिलने से लोगों की दिक्कतें बढ़ने लगी हैं।
छोटे व्यापारी भी करने लगे हैं पेटीएम का प्रयोग
चंपावत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैशलेस इकानॉमी की घोषणा से प्रेरित होकर अब छोटे व्यापारी भी पेटीएम का प्रयोग करने लगे हैं। पुस्तक विक्रेता कैलाश चंद्र पांडेय का कहना है कि उन्होंने अपने आसपास के सभी दुकानदारों के पेटीएम एकाउंट बनाए हैं, इसमें किसी भी प्रकार की लेन देन आसानी से हो जा रहा है।