जिला मुख्यालय से 22 किलोमीटर दूर स्वांला गांव में मंगलवार तड़के करीब साढ़े चार बजे उल्टी-दस्त से तीन साल की बच्ची की मौत हो गई। सोमवार शाम हालत अचानक खराब होने पर परिजनों ने उसे स्वांला के अस्पताल में दिखाया, लेकिन बच्ची के स्वास्थ्य में सुधार नहीं होने पर परिजनों ने रात 12 बजे आपात 108 सेवा को फोन किया। तीन घंटे तक आपात सेवा के नहीं पहुंचने पर प्रधान ईश्वरी दत्त भट्ट बच्ची को निजी वाहन से जिला अस्पताल ला रहे थे कि इसी बीच बच्ची ने धौन के पास दम तोड़ दिया।
स्वांला निवासी चिंतामणी भट्ट की पोती गौरी (3) अपने माता-पिता के साथ भागीपुरा कॉलोनी रुद्रपुर में रहती थी। गौरी के पिता गिरीश शर्मा सिडकुल में नौकरी करते हैं। गौरी कुछ दिनों पहले ही रुद्रपुर से अपनी मां रूपा देवी के साथ स्वांला आई हुई थी। सोमवार को गौरी उल्टी-दस्त से पीड़ित थी। परिजन उसे लेकर स्वांला अस्पताल आए, लेकिन वहां इलाज नहीं मिलने पर उसे घर ले गए।
रात में गौरी की तबीयत अचानक बिगड़ने पर परिजनों ने 108 सेवा को फोन किया, लेकिन तीन घंटे तक आपात सेवा के नहीं पहुंचने पर परिजन उसे निजी वाहन से जिला अस्पताल ले जा रहे थे कि रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। जिला पंचायत सदस्य उमाशंकर भट्ट, ग्राम प्रधान ईश्वरी दत्त भट्ट सहित अन्य ग्रामीणों ने गौरी की मौत के लिए स्वास्थ्य विभाग को जिम्मेदार ठहराते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है। इस संबंध में उन्होंने मुख्य चिकित्साधिकारी को भी खूब खरी-खोटी भी सुनाई।
स्वांला अस्पताल में ओआरएस तक उपलब्ध नहीं मिला
चंपावत। गर्मी के मौसम में स्वांला अस्पताल में ओआरएस का एक पैकेट तक नहीं है। स्वांला अस्पताल का संचालन केवल फार्मेसिस्ट के सहारे किया जा रहा है। सोमवार को जब गौरी की हालत खराब हुई तो परिजन उसे इलाज के लिए स्वांला अस्पताल लाए, लेकिन वहां ओआरएस तक नहीं मिलने से परिजन निराश होकर वापस आ गए। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि एक तरफ तो सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के लिए लाखों रुपये खर्च कर रही है।
दूसरी तरफ सरकारी अस्पतालों की दशा खराब है। स्वांला अस्पताल में कभी बडोली, क्वारसिंह, बेलखेत, चल्थी तक के लोगों का इलाज हुआ करता था, लेकिन आज इस अस्पताल में न कोई देखने वाला है और न ही कोई दवा उपलब्ध है।
एसीएमओ से कराई जाएगी मामले की जांच
चंपावत। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.एमएस बोहरा का कहना है कि बच्ची की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही की जांच की जाएगी। एसीएमओ डॉ.रश्मि भट्ट को मामले की जांच सौंपी गई है। उन्होंने अस्पताल में ओआरएस नहीं होने को गंभीरता से लिया है। कहा कि सभी दूरस्थ क्षेत्र के अस्पतालों को पर्याप्त दवाएं और ओआरएस उपलब्ध कराई गई हैं।
एक वर्ष पहले भी हो चुकी है एक बच्ची की मौत
चंपावत। स्वांला गांव में एक वर्ष पहले भी एक और बच्ची की उल्टी-दस्त से मौत हो गई थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रभावित गांव में स्वास्थ्य टीम भेजी गई थी।
ज्वाइनिंग लीव में चल रहे हैं डॉक्टर
चंपावत। स्वांला अस्पताल में चार मई को संविदा के आधार पर डॉक्टर की तैनाती की गई है, लेकिन वर्तमान में डॉक्टर ज्वाइनिंग लीव में चल रहे हैं। इस कारण अस्पताल का संचालन फार्मेसिस्ट के भरोसे हो रहा है।