खेतीखान मार्ग पर स्थित एक तीन मंजिला मकान अचानक ढह गया, जिससे मौके पर अफरातफरी मच गई। हादसे में मकान के मलबे के नीचे दबने से मां बेटी घायल हो गईं। दोनों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। मां के सिर में गंभीर चोट आने के कारण उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया है। घटना के दौरान नौ लोग घर से बाहर होने के कारण बाल-बाल बच गए।
नगर के खेतीखान मार्ग निवासी जहीर कुरेशी पुत्र शेख मल्लू अपने तीन भाईयों के साथ लकड़ी पाथरों से बने तीन मंजिले मकान में रहता है। बृहस्पतिवार को अचानक यह मकान ढह गया। जहीर कुरैशी की पत्नी सबाना (28) और पुत्री रिदा (8) मलबे के नीचे दब गए। घायलों की चीख पुकार और मकान टूटने की आवाज सुनकर बड़ी संख्या में आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए। उन्होंने बचाव कार्य शुरू करने के साथ घटना की सूचना पुलिस को दे दी। इस पर एसआई हेमंत कठैत, एसआई देवेंद्र मेहता के नेतृत्व में पुलिस और फायर ब्रिगेड की राहत और बचाव टीमें मौके पर पहुंच गई।
उन्होंने लोगों की मदद से दोनों घायलों को मलबे से बाहर निकालकर उपचार के लिए सीएचसी भेज दिया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक डॉ.मंजीत सिंह ने बताया कि सबाना के सिर में गंभीर चोटें आई हैं, बेहतर उपचार के लिए उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया है। बताया जा रहा है कि जहीर अपनी चार बेटियों और पत्नी के साथ दूसरी मंजिल में रहता है। उसका भाई अतीक अपनी पत्नी नूरजहां और तीन बच्चों के साथ तीसरे मंजिल में रहता है। पहली मंजिल में रहने वाला भाई जहांगीर उसके बच्चे हल्द्वानी रिश्तेदारी में हुए थे। जिस समय मकान ढहा उस दौरान सबाना और रिदा ही घर में थे। परिवार के अन्य नौ लोग खाना खाने के बाद दूसरी छत में गए हुए थे। जिससे वे बाल बाल बच गए।
बारिश के कारण अधिक पानी सोखने से ढहा मकान
भवन स्वामी जहीर का कहना है कि उनके चाचा द्वारा उसके मकान के बगल स्थित अपना मकान एक व्यक्ति को बेचा गया है। संबंधित व्यक्ति द्वारा उनके मकान की बुनियाद के बगल से सात फिट नीचे अपनी बेसमेंट बनाई जा रही थी। बुधवार की शाम हुई वर्षा के कारण मिट्टी द्वारा अधिक पानी सोखने की वजह से उनका मकान ध्वस्त हुआ है। क्षेत्र के लोगों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की है।
तीन परिवारों के सामने पैदा हुई रहने की समस्या
लोहाघाट (चंपावत)। अचानक तीन मंजिला मकान ध्वस्त होने के कारण जहीर, अतीक और जहांगीर के परिवारों के सामने रहने की गंभीर समस्या पैदा हो गई है। छह कमरों के इस मकान के ध्वस्त होने के कारण परिजनों ने अपने रिश्तेदारों के यहां शरण ली हुई है। घर में रखा उनकी गृहस्थी का पूरा सामान बर्बाद हो गया है। आर्थिक तंगी के कारण तीनों ही भाई अपने पिता द्वारा 80 वर्ष पूर्व बनाए गए मकान में रहकर अपने परिवार का भरण पोषण करते थे।