बरसात के मौसम में भी लोहाघाट के लोगों को तीन दिन में पानी मिल रहा है। पेयजल संकट ने नगर का विकास भी अवरुद्ध कर दिया है। जल संस्थान का कहना है कि उसे रोज 16 लाख लीटर पेयजल की आवश्यकता है। लेकिन उसके पास 7.20 लाख लीटर की ही भंडारण क्षमता है। यदि पांच-पांच लाख लीटर क्षमता के दो और टैंक बनाए जाते हैं तो लोगों को रोज पानी मिल सकेगा।
नगर के लिए प्रस्तावित सरयू पेयजल योजना पिछले दस सालों से फाइलों में बंद पड़ी है। प्रस्तावित योजना से नगर की पेयजल योजनाओं के विस्तार संबंधी मामले भी लटके हैं। लोगों का कहना है कि जिला योजना में पांच-पांच लाख लीटर क्षमता के टैंक स्वीकृत हो सकते हैं। लेकिन अब तक जल संस्थान या जल निगम की ओर से जिला योजना में यह प्रस्ताव लाया ही नहीं गया है।
जल संस्थान के अधिकारी कहते हैं कि टैंक बनाने का काम जल निगम का है। दूसरी ओर जल निगम के अधिकारी कहते हैं कि यह सारा कार्य जल संस्थान को करना है। दोनों विभागों की हठधर्मी आम लोगों पर भारी पड़ रही है।
हर हालत में रोज मिलना चाहिए पानी
विधायक पूरन सिंह फर्त्याल का कहना है कि उन्होंने विधायक निधि से 70 हजार लीटर क्षमता का टैंक बनवाया है। विभाग ने अभी तक बड़ी क्षमता के टैंकों की बात नही बताई है। जिला योजना में इन्हें अब प्रस्तावित किया जाएगा। लोगों को हर हालत में रोज पानी मिलना चाहिए।
शासन को भेजी गई है डीपीआर
लोहाघाट। जल निगम के ईई हरीश चंद्र भारती का कहना है कि लोहाघाट नगर के लिए 43 करोड़ रुपये लागत की पेयजल योजना की डीपीआर शासन में स्वीकृति के लिए विचाराधीन है। उसकी स्वीकृति मिलते ही निमार्ण कार्य शुरू हो जायेगा।