चंपावत जिले में आपात सेवा 108 खुद बीमार हाल में है। शनिवार को चंपावत की तीन आपात सेवा 108 एंबुलेंस का संचालन ईंधन की कमी के कारण पूरी तरह बंद हो गया है। बची हुई दो एंबुलेंस भी 10 किलोमीटर तक ही जा पा रही हैं। इसके चलते लोगों को भारी समस्या झेलनी पड़ रही है। शुक्रवार शाम को चंपावत के एक युवक को हायर सेंटर सुशीला तिवारी अस्पताल, हल्द्वानी ले जाने के लिए मरीज के तीमारदारों को खुद 108 में ईंधन डलवाना पड़ा।
जिले की पांच एंबुलेंस में से चंपावत, लोहाघाट और पाटी शनिवार को पूरी तरह बंद रही, जबकि दो अन्य एंबुलेंस टनकपुर और रीठा साहिब भी अब लोकल में ही सेवा दे पा रही है। इसके चलते लोगों को भारी समस्या हो रही है। वहीं 1 मई से 108 सेवा का संचालन जीवीके के बजाय कैंप (कम्युनिटी एक्शन थ्रू मोटिवेशन प्रोग्राम) संस्था की ओर से किया जाना है।
रजत उनियाल, जिला समन्वयक, आपात सेवा 108 ने कहा कि ईंधन नहीं मिलने से जिले की तीन 108 सेवा को शनिवार को बंद करने को मजबूर होना पड़ा। ईंधन की मांग की गई है। ईंधन मिलने के बाद सेवा सुचारु हो सकेगी।
टायरों की कमी से नहीं चल पा रहीं दो केकेएस
चंपावत। जिले में खुशियों की सवारी (केकेएस) भी बुरे हाल में है। जिले की तीनों केकेएस पुराने और घिसे हुए टायरों से चल रही हैं। चंपावत जिले में तीन केकेएस हैं लेकिन इस वक्त केवल टनकपुर की केकेएस ही ठीक काम कर रही है। टायर खराब होने से चंपावत की केकेएस 20 दिन से बंद है।
लोहाघाट की केकेएस के टायर इस स्थिति में नहीं हैं कि वह 10 किमी से ज्यादा लंबी दूरी तय कर सके। एकमात्र टनकपुर की केकेएस ही ठीक हाल में है। जिला समन्वयक रजत उनियाल का कहना है कि केकेएस के लिए छह टायरों की मांग काफी वक्त पहले की गई थी लेकिन ये टायर अभी तक नहीं मिल सके हैं। 16 अप्रैल को बुड़ाखेत गांव की भवानी देवी और उनके नवजात शिशु को घर तक पहुंचाने के लिए केकेएस नहीं मिल सकी थी जिसके बाद उन्होंने गांव तक जाने के लिए 1200 रुपये में जीप बुक कराई। ब्यूरो
ईंधन नहीं मिलने से खड़ी हुई 108 सेवा
पिथौरागढ़। ईंधन नहीं मिलने से कई जगहों पर आपातकालीन 108 सेवा और खुशियों की सवारी के वाहन खड़े हो गए हैं। इससे मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। डीडीहाट, थल, पिथौरागढ़, गंगोलीहाट और धारचूला में वाहन ईंधन के बगैर खड़े हैं। मुनस्यारी, बेड़ीनाग, कनालीछीना और मूनाकोट के वाहन मैंटनेंस के बगैर खड़े हैं। कहीं कर्मचारी छुट्टी में हैं तो कहीं ईंधन नहीं है। इनमें से कुछ वाहन स्थानीय स्तर पर भी मरीजों को लाने का कार्य कर रहे हैं।
108 केकेएस संगठन के जिलाध्यक्ष दीवान नाथ ने बताया कि जीवीकेईएमआरआई कंपनी से जिले में 54 कार्मिक जुड़े हैं जो पिछले 11 वर्षों से सेवा दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि नई कंपनी कैंप महज 8300 रुपये के मानदेय पर कार्मिकों को रख रही है। कहा कि इतनी महंगाई में इतने कम मानदेय में परिवार का भरण-पोषण करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि कार्मिकों का शोषण सहन नहीं किया जाएगा। बताया कि मांगों को लेकर 24 अप्रैल को देहरादून सचिवालय में घेराव किया जाएगा। ब्यूरो
24 अप्रैल को ठप करेंगे आपात सेवा
लोहाघाट (चंपावत)। राज्य सरकार द्वारा संचालित 108 आपात सेवा और खुशियों की सवारी कर्मियों को जीवीके कंपनी द्वारा अप्रैल में सेवा समाप्ति का नोटिस दे दिया गया है। इस नोटिस के बाद से कर्मियों में नाराजगी है। उन्होंने नई कंपनी के जरिए आपात सेवा कर्मियों को उसी मानदेय और लोकेशन में तैनाती देने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि 23 अप्रैल तक मांगें नहीं माने जाने पर 24 अप्रैल को आपात सेवाएं ठप कर सचिवालय का घेराव करेंगे।
108 सेवा के संगठन के जिलाध्यक्ष गोविंद तिवारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में वक्ताओं ने कहा कि 108 और खुशियों की सवारी के कर्मचारियों द्वारा 11 वर्षों तक उल्लेखनीय सेवाएं दी गईं। इस सेवा की बदौलत 108 सेवा को जीवनदायिनी सेवा का नाम मिला लेकिन अब जीवीके कंपनी की ओर से 30 अप्रैल तक उनकी सेवाएं समाप्त करने का नोटिस भेजा गया है। सरकार ने आपात सेवाओं के संचालन के लिए नई कंपनी के साथ अनुबंध कर लिया है जो बेहद कम मानदेय में काम कराने के लिए दबाव बना रही है।
पूर्व में रखे गए कर्मचारियों को पहले प्रशिक्षण दिया जाता था, उसके बाद उन्हें सेवा दी जाती थी लेकिन नई कंपनी अनुभवों को दरकिनार कर तीन दिन का मामूली प्रशिक्षण देकर भर्ती कर रही है। इस फैसले के विरोध में सभी आपात सेवा कर्मियों ने 24 अप्रैल को आपात सेवाएं ठप कर दून में होने वाली महारैली में शामिल होने और सचिवालय का घेराव करने का निर्णय लिया है।
बैठक में भगवान मेहता, दीपक मनराल, मदन सिंह, प्रियंका, ललित अधिकारी, धीरेंद्र बिनवाल, पवन खेतवाल, कमल परवाल, गणेश जोशी, सुशीला गड़कोटी, उमेद सिंह, कमल चम्याल, रोशन, गोपाल बुराठी, गोविंद बोहरा, पवन कुमार, अर्जुन सिंह, भूपेंदर सिंह, राजेंद्र प्रसाद, विजय सिंह आदि थे।