फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एक बूथ वाला प्रदेश का अकेला सेक्टर है खिरद्वारी 

Tue, 12 Mar 2019 10:56 PM IST
बृजमोहन बृजमोहन चंद्रशेखर जोशी  चंपावत।
विज्ञापन
इकलौत मतदान बूथ वाला प्रदेश का सबसे छोटा खिरद्वारी सेक्टर। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

 नेपाल सीमा से सटा खिरद्वारी गांव प्रदेश का सबसे छोटा सेक्टर है। अब तक के चुनावों में यह दूसरी बार बूथ बनाया गया है। यहां एक पोलिंग बूथ (मतदेय स्थल) के लिए एक सेक्टर बनाया गया है। चंपावत जिले के 191179 वोटरों में से यहां महज 404 वोटर हैं। पोलिंग सामग्री पहुंचाने के लिए नदी के किनारे रोखड़ से ट्रक के जरिए बूथ तक सामग्री पहुंचाई जाएगी। 

विज्ञापन


यह वन रावतों का गांव है। विकास के नाम पर जूनियर हाईस्कूल के अलावा यहां कोई अन्य इंतजाम नहीं है लेकिन लोकसभा चुनाव को लेकर सरकारी बंदोबस्त खूब हो रहे हैं। जिला निर्वाचन अधिकारी रणवीर सिंह चौहान ने बताया कि चुनाव संचालन के लिए अल्मोड़ा संसदीय सीट के अंतर्गत आने वाले चंपावत जिले की दोनों विधानसभा सीटों को 5 जोन और 51 सेक्टर में बांटा गया है लेकिन यहां एक ऐसा सेक्टर भी है जिसके अंतर्गत सिर्फ एक पोलिंग बूथ है।

खिरद्वारी में लोकसभा चुनाव में दूसरी बार पोलिंग बूथ बनाया गया है। इसकी जिम्मेदारी एक सेक्टर मजिस्ट्रेट की है। सेक्टर मजिस्ट्रेट इंजीनियर पीसी पंत ने पोलिंग बूथ का मुआयना करने के साथ ही मतदान के लिए जागरूकता को प्रेरित किया। 
विज्ञापन


खिरद्वारी में 218 पुरुष और 186 महिला वोटर हैं। यहां से 39 किलोमीटर दूर चल्थी से करीब 16 किलोमीटर पैदल दूरी पर स्थित खिरद्वारी गांव के राजकीय प्राइमरी स्कूल में मतदेय स्थल हैं। स्कूल में बिजली नहीं होने से उजाले और ईवीएम के संचालन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। इस बूथ में खिरद्वारी के अलावा भड़ियास और फुरकियाझाला के लोग वोट डालेंगे। 

2012 से पहले पांच किमी दूर करते थे मतदान 
खिरद्वारी में लोकसभा में भले ही पहली बार 2014 में बूथ बनाया गया था लेकिन विधानसभा चुनाव में इसे 2012 में मतदान केंद्र बनाया गया था। इससे पूर्व यहां के लोग पांच किमी दूर गंगसीर में मतदान करते थे। मतदान केंद्र के नजदीक होने से मतदान प्रतिशत में भी इजाफा हुआ है। 

यहां तो प्रचार के लिए भी नहीं पहुंचते सांसद 
-  खिरद्वारी गांव में आजादी के 72 साल बाद कोई भी सांसद नहीं पहुंचा। ग्रामीणों का कहना है कि सांसद का पहुंचना तो दूर सांसद पद के प्रत्याशी वोट मांगने तक भी नहीं पहुंचे। 


सस्ते गल्ले के लिए भी 16 किमी की दौड़ लगा रहे हैं ग्रामीण 
चंपावत। खिरद्वारी गांव पिछड़ेपन का पर्याय है। गांव के सभी 23 परिवार अंत्योदय श्रेणी में आते हैं। केंद्र सरकार की सौभाग्य योजना के बावजूद यह गांव अभी तक बिजली से जगमग नहीं हो सका है। 103 साल के सबसे बुजुर्ग मतदाता दान सिंह का कहना है कि गांव में बिजली देखना उनका सपना है लेकिन उन्हें नहीं लगता कि जीते जी ये सपना पूरा हो सकेगा। 
ग्राम प्रधान लक्ष्मी देवी का कहना है कि बिजली नहीं होने से लोगों को तो समस्या हो ही रही है, प्राइमरी स्कूल में भी कंप्यूटरों का संचालन नहीं हो पा रहा है। अस्पताल के लिए 16 किमी दूर चल्थी की दौड़ लगानी पड़ रही है। जोत सिंह, गणेश सिंह, जय सिंह, नंदा देवी, कौशल्या देवी सहित तमाम ग्रामीणों का कहना है कि यहां के लोगों को सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान के लिए भी 16 किमी दूर चल्थी जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। 

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें