चंपावत के रोजिन फैक्ट्री परिसर में हो रहा अतिक्रमण।
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चंपावत। मेक इन इंडिया के सपने को साकार करने के बजाय उत्तराखंड बनने के बाद बंद हो चुकी रोजिन टरपंटाइन फैक्ट्री की जमीन को बचाना ही अब चुनौती बन रहा है। फैक्ट्री की इस जमीन के कुछ हिस्सों पर अतिक्रमण शुरू हो गया है। फैक्ट्री की बेशकीमती जमीन को बचाने के लिए खुद केएमवीएन (कुमाऊं मंडल विकास निगम) कर्मी आगे हैं। कर्मियों ने निगम और प्रशासन से फैक्ट्री को अतिक्रमण से बचाने के साथ इस जमीन का उपयोग पार्किंग और बारातघर के लिए करने का सुझाव दिया है।
लीसे की प्रचूरता के चलते 1977 में 230 नाली जमीन पर स्थापित यह फैक्ट्री लगातार मुनाफे में चलती रही। लेकिन लीसा नीति में संशोधन के बाद 31 कर्मियों को रोजगार देने वाली कुमाऊं की यह इकलौती फैक्ट्री 2005 में बंद हो गई। दिसंबर 2019 में फैक्ट्री की मशीनरी और अन्य उपकरण भी नीलाम किए जा चुके हैं। जिला अस्पताल और तहसील कार्यालय के लिए जमीन दिए जाने के बावजूद इसके पास अभी 170 नाली से अधिक जमीन है, लेकिन देखरेख के अभाव में जमीन के कुछ हिस्से अतिक्रमण के चपेट में आ रहे हैं।
केएमवीएन कर्मचारी महासंघ के नेताओं का कहना है कि एनएच से लगी निगम की बेशकीमती जमीन को बचाने के लिए इसकी तारबाड़ और सुरक्षा जरूरी है। साथ ही इस जमीन का उपयोग बारातघर और पार्किंग स्थल के रूप में कर नगर की पार्किंग की दिक्कत को दूर किया जा सकता है। साथ ही इससे निगम की आमदनी और रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
कोट
रोजिन टरपंटाइन की बंद हो चुकी फैक्ट्री की जमीन में अतिक्रमण होने की शिकायत की जांच कराई जाएगी। अगर किसी ने अतिक्रमण किया होगा, तो जमीन वापस ली जाएगी। जहां तक इसके किसी तरह के उपयोग का सवाल है, इसका फैसला कुमाऊं मंडल विकास निगम को लेना है।
टीएस मर्तोलिया, एडीएम, चंपावत।