चंपावत। जिले में पांच होम्योपैथिक अस्पताल हैं। कहीं जगह की कमी तो कहीं डॉक्टर, फार्मासिस्ट की नहीं हैं। कहीं किराये के भवन में अस्पताल चल रहा है। इन समस्याओं के कारण क्षेत्र के मरीजों को बेहतर उपचार नहीं मिल रहा है। पांच होम्योपैथिक अस्पतालों पर करीब 20 से अधिक गांव की आबादी निर्भर हैं। इन पांच अस्पतालों में हर रोज 150 से अधिक मरीज इलाज के लिए आते हैं। अस्पतालों में अव्यवस्थाओं के कारण इलाज नहीं मिल पा रहा है। दवा का भंडारण भी एक ही कक्ष में हो रहा है। राजकीय होम्योपैथिक लोहाघाट में सबसे अधिक 60 मरीज इलाज के लिए आते हैं। चौड़ी, कलीगांव, पाटन पाटनी, फोर्ती, सुई गांव के लोग होम्योपैथिक पद्धति से उपचार कराते हैं।
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मढुवां अस्पताल किराये पर
चंपावत। राजकीय होम्योपैथिक मढुवां अस्पताल किराये के भवन में चल रहा है। इस अस्पताल में सुल्ला, पासम, मटियानी, कमलेड़ी और डूंगरा बोहरा के लोग उपचार कराने के लिए आते हैं। अस्पताल में 20 मरीज रोज आते हैं। जबकि राजकीय होम्योपैथिक पुलहिंडोला और बाराकोट में संविदा फार्मासिस्ट और चिकित्सक मरीजों का उपचार करते हैं। यहां पर चमदेवल आदि गांव के लोग उपचार कराने आते हैं। बाराकोट होम्योपैथिक अस्पताल में चिकित्सक मरीजों का उपचार और उन्हें दवा देने का काम करते हैं। अस्पताल में बाराकोट, पम्दा, काकड़, खोला सुनार और फर्तोला के लोग उपचार के लिए करीब 30 मरीज रोज उपचार के लिए आते हैं। अस्पताल में वार्ड बॉय का पद नहीं होने से लोगों दवा सहित अन्य कार्यों में परेशानी झेलनी पड़ती है।
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शासन को जिले के पांच होम्योपैथिक चिकित्सालयों की समस्याओं को लेकर पत्र भेजा गया है। पद रिक्त होने के कारण मरीजों के इलाज में दिक्कतें आती हैं।
डॉ. भूपेंद्र प्रसाद, प्रभारी चिकित्साधिकारी जिला होम्योपैथिक विभाग