लोहाघाट विकासखंड के पुलहिंडोला में स्वीकृत मिनी ट्यूबवेल पिछले पांच महीने से अधर में लटका हुआ है। जल संकट से जूझ रहे इस क्षेत्र के लोग समस्या के समाधान के लिए ट्यूबवेल बनने का इंतजार कर रहे हैं। शासन है कि इसके निर्माण के लिए अवशेष बजट को रिलीज नहीं कर दे रहा है। बजट की कमी से इसका निर्माण कार्य पिछले पांच महीने से अधर में लटका हुआ है।
पुलहिंडोला क्षेत्र लंबे समय से जल संकट की समस्या से जूझ रहा है। क्षेत्रवासियों को इस समस्या से निजात दिलाने के लिए 2014 में यहां 1.27 करोड़ रुपये लागत से मिनी ट्यूबवेल स्वीकृत किया गया। निर्माण कार्य की सुस्त गति और समय से धन अवमुक्त नहीं होने से इसका निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है। पुलहिंडोला क्षेत्र में एक भी पेयजल योजना नहीं है, ग्रामीणों की पूरी निर्भरता यहां लगे छह हैंडपंपों पर टिकी हुई है। जिसमें तीन हैंडपंप सूख चुके हैं। क्षेत्रवासी पानी के लिए तीन हैंडपंपों पर निर्भर हैं। मिनी ट्यूबवेल का निर्माण कार्य अधर में लटकने से पुलहिंडोला की करीब एक हजार की आबादी हैंडपंपों और 800 मीटर दूर चरनौला गधेरे, पुल्ला गधेेरे से पानी ढोने को मजबूर हैं।
राहत का इंतजार कर रहे लोग
सामाजिक कार्यकर्ता देवेंद्र पाटनी का कहना है कि क्षेत्र के लिए मिनी ट्यूबवेल की स्वीकृति होने पर लोग काफी खुश थे। उन्हें उम्मीद थी कि इसके निर्माण के बाद उन्हें पेयजल किल्लत से निजात मिलेगी। लेकिन ट्यूबवेल का कार्य चार वर्ष बाद भी पूरी न होने पर लोग मायूस हैं।
गाड़-गधेरे से पानी ढो रहे लोग
नकुल पंत का कहना है कि पुलहिंडोला क्षेत्र में लोग पेयजल किल्लत से काफी परेशान हैं। क्षेत्र में लगे हैंडपंपों में से अधिकांश हैंडपंप अक्सर खराब रहते हैं। लोगों को गाड़ - गधेरों से पानी ढोने को मजबूर होना पड़ रहा है। ट्यूबवेल निर्माण का कार्य अधूरा होने से लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है।
दोहरी मार झेल रही हैं महिलाएं
विमला अधिकारी का कहना है कि ट्यूबवेल का निर्माण कार्य शीघ्र पूरा नहीं होने से महिलाओं को सबसे अधिक दिक्कत हो रही हैं। उन्हें घर का सारा कामकाज करने के साथ बच्चों को स्कूल भेजना पड़ता है। उनका ज्यादातर समय पानी की व्यवस्था करने में बर्बाद हो जाता है।
बूंद-बूंद पानी को तरसने की मजबूरी
दीपक पंत का कहना है कि पुलहिंडोला क्षेत्र में पेयजल की किल्लत सबसे बड़ी समस्या है। जाड़ों और बरसात में तो जैसे-तैसे पानी की पूर्ति हो जाती है, लेकिन गरमियों में लोगों को बूंद-बूंद पानी के लिए तरसना पड़ता है। क्षेत्र में स्वीकृत ट्यूबवेल चालू हो जाता, तो काफी हद तक लोगों की पेयजल की समस्या दूर होती।
कोट
मिनी ट्यूबवेल के निर्माण कार्य में सिविल वर्क पूरा कर लिया गया है। जिसमें पेयजल लाइनें बिछाने, टैंक निर्माण आदि कार्य पूरा कर लिया गया है। 1.27 करोड़ रुपये के सापेक्ष 67 लाख रुपये अवमुक्त हुए हैं। धनाभाव के कारण पंप सैट नहीं लग पा रहा है। करीब पांच महीने से कार्य रुका हुआ है। जिला योजना में धन की मांग की गई है।महेंद्र सिंह, अभियंता, जल निगम, लोहाघाट।