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जंगल गई महिला को बाघ ने मारा

Sun, 26 Feb 2017 09:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, टनकपुर (चंपावत)
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जंगल गई महिला को बाघ ने मारा - फोटो : अमर उजाला
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शारदा रेंज के जंगल की द्ववान बीट से लकड़ी बीनने गई बोरागोठ गांव की महिला को बाघ ने मार डाला। बाघ शव को करीब डेढ़ सौ मीटर दूर जंगल में घसीट ले गया था। करीब आधा घंटे रेस्क्यू के बाद वन विभाग की टीम ने महिला का क्षत-विक्षत शव झाड़ी से बरामद किया। इस दौरान वन कर्मियों ने दो राउंड हवाई फायर भी किए। सूचना पर लोगों की भीड़ लग गई।
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शहर से लगे बोरागोठ गांव निवासी सोना देवी (55) पत्नी केशर राम रविवार को गांव की ही दो अन्य महिलाओं गायत्री जोशी और नीला भंडारी के साथ शारदा रेंज के द्ववान बीट के कंपार्टमेंट संख्या 1 बी में लकड़ी बीनने गई थी। सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे बाघ ने सोना देवी पर हमला कर दिया। बाघ के हमले से महिलाओं के होश उड़ गए। दोनों महिलाएं शोर मचाते हुए जंगल से भागकर टनकपुर-चंपावत राजमार्ग पर आ गईं और लोगों को घटना की जानकारी दी। प्रत्यक्षदर्शी गायत्री जोशी के मुताबिक बाघ सोना देवी को जंगल की ओर घसीटकर ले गया।

सूचना पर वन क्षेत्राधिकारी ख्याली राम, वन दरोगा दान सिंह भाकुनी और मुनेश सिंह राणा, वन बीट अधिकारी कैलाश सिंह, महेश अधिकारी, पुलिस उप निरीक्षक दीवान सिंह जलाला मौके पर पहुंचे। रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। करीब आधा घंटे तक जंगल छानते हुए रेस्क्यू टीम ने घटना स्थल से करीब डेढ़ सौ मीटर दूर झाड़ी में सोना देवी का क्षत-विक्षत शव बरामद किया। वन विभाग और पुलिस ने जरूरी कार्रवाई के बाद शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। वन विभाग के उच्चाधिकारियों को घटना की जानकारी दे दी गई है। सोना देवी के परिवार की माली हालत ठीक नहीं है। उसका पति छोटी काश्तकारी करता है। तीन बेटे फल बेचकर परिवार का खर्च चलाते हैं।
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वन विभाग तीन लाख मुआवजा देगा
बाघ के हमले से मृत महिला के परिवार को विभाग की ओर से तीन लाख रुपए का मुआवजा मिलेगा। सरकार ने वन्यजीवों के हमले से मृतकों के परिवार को छह लाख रुपए की घोषणा की है, लेकिन अब तक शासनादेश जारी नहीं होने से पूर्व में निर्धारित मुआवजे की धनराशि तीन लाख रुपए ही मुआवजा दिया जाएगा। -ख्याली राम आर्य, वन क्षेत्राधिकारी, शारदा रेंज टनकपुर। 
  

1981 में दोगाड़ी रेंज में भी बाघिन ने ली थी एक मजदूर की जान
हाथी और अन्य वन्यजीव वैसे तो कई लोगों की जान ले चुके हैं, लेकिन तीन दशक में बाघ के हमले से मौत का यह दूसरा मामला है। वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इससे पहले वर्ष 1981 में तब हल्द्वानी वन प्रभाग और चंपावत वन प्रभाग के दोगाड़ी रेंज में बाघिन ने एक मजदूर को मार दिया था। वन दरोगा दान सिंह भाकुनी ने बताया कि मजदूर की मौत की घटना के बाद विभाग ने उक्त हमलावर बाघिन को कैद कर लखनऊ चिड़ियाघर में भेज दिया था।
  

जंगल से लगे गांवों में बढ़ा वन्यजीवों का खौफ 
 बाघ के हमले में महिला की मौत के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है। शारदा एवं बूम रेंज के जंगल से लगे गांवों में अक्सर बाघ और तेंदुओं की दस्तक लोगों के मुसीबत बन गई है। वहीं होली के बाद शुरू होने वाले उत्तर भारत के सुविख्यात मेले में भी यात्रियों की वन्यजीवों से सुरक्षा भी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी।

पूर्णागिरि मार्ग के जंगल से लगे उचौलीगोठ, थ्वालखेड़ा, गैंड़ाखाली, चिलियाघोल, नायकगोठ और आमबाग एवं विचई गांवों में भी हाथियों का झुंड दस्तक देकर काश्तकारों की फसल तबाह करता है तो कभी तेंदुए द्वारा गौशालाओं में घुसकर मवेशियों को मारने की घटनाएं अक्सर सामने आती है। हाल ही में मनिहारगोठ गांव में भी तेंदुए की दस्तक से लोगों में दहशत बनी है। इधर, पूर्णागिरि मार्ग के जंगल से लगे गांवों में बीते दो माह से बाघ और तेंदुए की दस्तक से लोग खासे भयभीत हैं, रविवार को बाघ के हमले से महिला की मौत की घटना से गांवों में खौफ और बढ़ गया है। शारदा रेंज के रेंजर ख्याली राम आर्य का कहना है कि वन्यजीवों का गांवों में प्रवेश रोकने को विभाग की टीम को नियमित गश्त पर लगाया गया है, लेकिन अब उच्च अधिकारियों से वार्ता कर सुरक्षा के अन्य उपायों के बारे में रणनीति बनाई जाएगी।
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