जिले में पर्यटन उद्योग और धार्मिक पर्यटन को गति देने के साथ-साथ सिंचाई सुविधा के विस्तार के लिए जल्द ही कूर्म सरोवर का निर्माण साकार रूप लेगा। जिला मुख्यालय से करीब 11 किलोमीटर दूर स्थित सिमल्टा न्याय पंचायत के सिमल्टा क्षेत्र की कृषि योग्य बंजर भूमि में कूर्म सरोवर के निर्माण की कवायद शुरू हो गई है। सिंचाई विभाग की ओर से कूर्म सरोवर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने से पूर्व प्रस्तावित क्षेत्र मे सर्वे का कार्य शुरू कर दिया गया है।
सर्वे के अनुसार सिमल्टा ग्राम पंचायत की भूमि में तीन किमी परिक्षेत्र में प्रस्तावित सरोवर का निर्माण किया जाएगा। जिसके लिए क्रांतेश्वर की पहाड़ी की पूर्वी ढलान के स्रोत (कैचमेंट एरिया) के जल से सरोवर को भरा जाएगा। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता अवधेश कुमार के अनुसार मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की चंपावत जिले में सरोवर बनाए जाने की घोषणा के अनुरूप प्रस्तावित कूर्म सरोवर की प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। विभाग की ओर से प्रस्तावित सरोवर के निर्माण के लिए प्रारंभिक सर्वे कर ली है। जिसकी डीपीआर तैयार की जा रही है, जिसे मंजूरी के लिए शासन को भेजा जाएगा।
क्रांतेश्वर में भगवान विष्णु ने लिया था कूर्मावतार
चंपावत। धार्मिक मान्यता है कि क्रांतेश्वर महादेव मंदिर की पहाड़ी में भगवान विष्णु ने कूर्मावतार लिया था। इतिहासकार देवेंद्र ओली के अनुसार कूर्म पर्वत के नाम से कुमाऊं शब्द बना है। कुमाऊं शब्द संस्कृत के कूर्म शब्द का ही अपभ्रंश है। माना जाता है कि भगवान विष्णु के पद चिन्ह आज भी हैं। स्कंद पुराण के मानसखंड में भी कूर्म नाम के पर्वत का वर्णन है।
चाराल क्षेत्र के गांवों की पेयजल समस्या होगी हल
चंपावत। प्रस्तावित कूर्म सरोवर को लेकर स्थानीय लोगों में उत्साह का माहौल है। सामाजिक कार्यकर्ता हरीश चंद्र पांडेय का कहना है कि प्रस्तावित सरोवर के काफी ऊंचाई में स्थित होने के कारण मुख्यालय के चाराल क्षेत्र को सिंचाई सुविधा के साथ ही पेयजल समस्या से भी राहत मिलेगी। सिंचाई विभाग के अनुसार सरोवर के निर्माण के बाद कमैला, कठाड़, सिमल्टा के राजस्व गांवों को सिंचाई सुविधा का लाभ मिलेगा।