आईटीबीपी के हिमवीरों ने सोमवार को दारमा घाटी की 20,336 फीट ऊंची हिमाच्छादित खिमलिंग चोटी को फतह कर अपना नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित कर लिया है।
सुबह 6.55 बजे 36वीं वाहिनी के लवराज और 14वीं वाहिनी के कवींद्र सिंह ने पहली बार इस दुर्गम पहाड़ी पर राष्ट्रीय ध्वज के साथ आईटीबीपी का ध्वज फहराने में कामयाबी हासिल कर ली है।
शेष हिमवीर भी चोटी को फतह करने के प्रयास में लगे हुए हैं। हालांकि मौसम बाधा बना हुआ है। रविवार से यहां मौसम खराब होने के कारण बर्फीला तूफान चल रहा है।
यह पहाड़ी पंचाचूली से भी काफी जटिल और दुर्गम है। आईटीबीपी की ओर से पंचाचूली पर्वत शिखर को भी पहले फतह किया जा चुका है।
आईटीबीपी की पूर्वी परिक्षेत्र के आईजी पुनीत रस्तोगी, डीआईजी आरएम सिंह मंगलवार को सुबह हेलीकॉप्टर से इस शैल शिखर का निरीक्षण करेंगे।
उनके साथ 36वीं वाहिनी के कमांडेंट आनंद सिंह और 14वीं वाहिनी के रणवीर सिंह भी जाएंगे। अभियान दल में 17 हिमवीर शामिल थे, जिनके सहयोग के लिए 14 अन्य हिमवीर भी अभियान से जुड़े हैं।
शेष हिमवीरों के खिमलिंग तक पहुंचने का प्रयास जारी है। आईटीबीपी के द्वितीय कमान अधिकारी भानु प्रताप सिंह तथा डिप्टी लीडर उप सेनानी सुरेंद्र पंवार के नेतृत्व में 17 सितंबर को यह दल लोहाघाट से रवाना हुआ था।