जिला मुख्यालय से करीब 45 किलोमीटर दूर एनएच से लगे सिन्याड़ी गांव में बीयर फैक्ट्री खुलेगी। इसके लिए यहां बाकायदा काम शुरू हो गया है। यह कुमाऊं मंडल की पहली बीयर फैक्ट्री होगी। इसके खुलने से यहां की आर्थिक गतिविधियों के बढ़ने के साथ ही क्षेत्र के फल उत्पादकों को भी लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। डिस्टिलरी की वार्षिक क्षमता 1.5 लाख लीटर से 4 लाख लीटर बीयर की होगी।
डीएम दीपेंद्र कुमार चौधरी ने बताया कि गोल्डन फन फूड्स एंड बीयरेज प्राइवेट लिमिटेड नाम से यह प्राइवेट बीयर फैक्ट्री अस्तित्व में आएगी। इस फैक्ट्री में नाशपाती, माल्टा, संतरे, नींबू और सेब सहित पहाड़ के अन्य फलों से बीयर का निर्माण किया जाएगा। आबकारी विभाग के मुताबिक बीयर फैक्ट्री को मंजूरी मिल चुकी है। 1.5 लाख लीटर से 4 लाख लीटर बीयर का हर साल निर्माण किया जा सकेगा। कंपनी ने सिन्याड़ी में काम शुरू कर दिया है।
बीयर की खूब है मांग
आमतौर पर बीयर गर्मियों में पी जाती है, लेकिन चंपावत सहित पहाड़ के अन्य जिलों में बीयर की खूब मांग है। यहां तक कि नेपाल सीमा से लगे मैदानी क्षेत्र के लोग तो बीयर पीने के लिए नेपाल के ब्रह्मदेव और महेंद्रनगर तक जाते हैं। साल 2014-15 में जिले में 650 एमएल की 331887 और 500 एमएल की 25744 बोतलों की खपत हुई।
फल उत्पादकों को मिलेंगे बेहतर दाम
बीयर फैक्ट्री खुलने से क्षेत्र के फल उत्पादकों में उम्मीद जगी है। राजेश ओली, रमेश चौड़ाकोटी, रमेश राम सहित कई फल उत्पादकों का कहना है कि इस वजह से फलों की मांग बढ़ेगी और उन्हें वाजिब दाम मिलेगा। इस वक्त नाशपाती सहित कई सिटरस फलों को बाजार नहीं मिलने से खेतों में ही फेंकने तक को मजबूर होना पड़ता है। जिला उद्यान अधिकारी एचसी तिवारी का कहना है कि चंपावत जिले में सेब, नाशपाती, सिटरस फलों की बहुतायत में पैदावार होती है, लेकिन मांग कम होने से काफी फल औने-पौने दाम पर बेचने को मजबूर होना पड़ता है।
फल खेती का एरिया (हेक्टेयर) उत्पादन (एमटी)
सेब 619 439
कागजी नींबू 260 380
गलगल 406 1041
संतरा 535 920
माल्टा 1025 2110