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Champawat News: लैंडपोर्ट अप्रैल 2027 तक बनकर होगा पूरा, भारत नेपाल के बीच बढ़ेगा कारोबार

Wed, 25 Feb 2026 11:03 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
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बनबसा/चंपावत। काबीना मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि भारत की ओर से बनने वाला लैंडपोर्ट अप्रैल 2027 में पूरा हो जाएगा। मंत्री ने लोनिवि, वन विभाग, एनएचएआई, सिंचाई, लघु सिंचाई के अधिकारियों को परियोजना की सभी समस्याओं का हल कर निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
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बनबसा एनएचपीसी अतिथि सभागार में काबीना मंत्री ने बैठक की। उन्होंने कहा कि यह महत्वाकांक्षी परियोजना भारतीय भू-सीमा पत्तन प्राधिकरण की ओर से विकसित की जा रही है। उन्होंने अधिकारियों निर्देश दिए कि परियोजना अप्रैल 2027 तक हर हाल में पूर्ण कर ली जाए, इससे भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों, यात्री सुविधाओं का लाभ शीघ्र प्रारंभ हो सके।
उन्होंने कहा कि 500 करोड़ की लागत से निर्मित होने वाली आधुनिक लैंड पोर्ट परियोजना की सुरक्षा प्रणाली, डिजिटल निगरानी तंत्र और स्मार्ट प्रबंधन व्यवस्था से सुसज्जित किया जाए। इससे पूर्व उन्होंने लैंडपोर्ट का स्थलीय निरीक्षण किया। कहा कि यह आधुनिक लैंड पोर्ट भारत और नेपाल के मध्य व्यापार एवं यात्री आवागमन के लिए एक समेकित, सुरक्षित और सुविधाजनक प्रणाली विकसित करेगा। यहां सीमा शुल्क, सुरक्षा, व्यापार, सीमा प्रबंधन से संबंधित सभी प्रमुख एजेंसियां एक ही परिसर में कार्य करेंगी, इससे प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और तीव्रता सुनिश्चित होगी।
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उन्होंने कहा कि रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनबसा लैंड पोर्ट सीमा पार व्यापार को सशक्त बनाएगा, कृषि एवं औद्योगिक उत्पादों के लिए सुव्यवस्थित औपचारिक प्रवेश द्वार प्रदान करेगा और स्थानीय युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर सृजित करेगा। इस दौरान उन्होंने कहा कि सिंचाई विभाग की कुछ परिसंपत्तियां यूपी से ली जानी हैं। बनबसा डिवीजन में बनाया जाना है। बनबसा में रेट्रो फिटिंग की संभावनाओं पर जानकारी ली जा रही है। यूपी के काबीना मंत्री स्वतंत्र देव सिंह भी बात करेंगे। इस मौके पर सीडीओ डॉ. जीएस खाती, एडीएम कृष्णनाथ गोस्वामी आदि मौजूद रहे।

तराई पर्यटन को बढ़ावा देने का काम होगा
काबीना मंत्री ने तराई क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए ठोस एवं व्यावहारिक कार्ययोजना तैयार करने पर बल दिया। उन्होंने आगंतुकों की सुविधा के लिए सभी संकेतक पट्ट तीन भाषाओं में स्थापित करने, परियोजना परिसर में वर्षा जल संचयन प्रणाली को अनिवार्य रूप से सम्मिलित करने तथा संबंधित विभागों के मध्य सुदृढ़ समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही पर्यावरणीय स्वीकृतियों की प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण करने पर भी विशेष जोर दिया।
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