रेलवे मालगोदाम के पास सरकारी भूमि पर हुए कब्जे की संयुक्त पैमाइश में भूमि राजस्व की निकली है, जिसके आधार पर उक्त भूमि पर हुई रजिस्ट्री जायज हैं, लेकिन रेलवे अधिकारियों के अनुसार हाईकोर्ट के फैसले ने भूमि रेलवे की बताई है। बहरहाल रेलवे के अगले कदम द्वारा ही कोई निर्णय हो पाएगा।
कुछ दिन पहले रेलवे के अधिकार वाली भूमि पर खंभे लगाकर भूमि कब्जाने का मामला प्रकाश में आया था। शुक्रवार को राजस्व, रेलवे, वन विभाग द्वारा हुए संयुक्त सर्वे में भजनपुर स्थित खेत संख्या 129 की पैमाइश की गई, जिसमें .6290 हेक्टेयर (करीब 9 बीघा) भूमि राजस्व की निकली है। इस आधार पर भूमि पर कब्जेदारों के नाम पर हुई रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज प्रक्रिया को प्रशासन सही बता रहा है, लेकिन रेलवे के सीनियर सेक्शन इंजीनियर योगेश कुमार और सीनियर इंजीनियर मो. फारूख की मानें तो रेलवे ने वर्ष 2013 में हाईकोर्ट में भगवान दास पुत्र कन्हैयालाल से मुकदमा जीता है।
वे जल्द ही उक्त भूमि को खाली कराने की कार्रवाई के लिए प्रशासन से मदद लेने की बात कह रहे हैं। ज्वाइंट सर्वे में रेलवे के अधिकारियों के अलावा तहसीलदार बद्री सिंह रौतेला, सुपरवाइजर कानूनगो ईश्वर सिंह भीमा, पटवारी विरेंद्र कुमार, प्रदीप जुकरिया, भुवन जोशी, मनोज गहतोड़ी, वन दरोगा राकेश शुक्ला, वनवीट अधिकारी कमालुद्दीन आदि मौजूद थे।
रेलवे की कमी के चलते हुई रजिस्ट्री
भजनपुर में दर्ज खेत संख्या 129 और खेत संख्या 131 पर रेलवे का अधिकार था। रेलवे इस भूमि को हाईकोर्ट से जीत चुकी है, लेकिन हाईकोर्ट के निर्णय की प्रति राजस्व विभाग को नहीं दिए जाने से राजस्व विभाग के नक्शे और अभिलेखों में उक्त खेत संख्या पर रेलवे का नाम दर्ज नहीं हो पाया। इसी बीच करीब ढाई वर्ष पूर्व भूमि की रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज स्थानीय व्यक्तियों के नाम पर हो गई।
संयुक्त सर्वे में वन विभाग ने अपनी भूमि नहीं होना बताया है। राजस्व विभाग के नक्शे में भजनपुर ग्रामसभा के खेत संख्या 129 की भूमि वर्ग ए भूमिधरी की है। राजस्व के मानचित्र को महत्व दिया जाएगा। रेलवे के पक्ष को जानने के लिए न्यायालय के फैसले की प्रति पढ़ने और उनके अभिलेखों की जांच-पड़ताल के बाद ही कोई निर्णय लिया जा सकेगा। फिलहाल मामला विचाराधीन है। -एनसी दुर्गापाल, एसडीएम, टनकपुर।