नगर में हाड़ कंपा देने वाली ठंड में लोगों को चौथे दिन पानी मिल रहा है तो गर्मियों में क्या हाल होगा यह सोच कर लोग परेशान हैं। नगर में लगातार आबादी बढ़ने के साथ नए भवनों का निर्माण होने से पानी की मांग बढ़ती जा रही है।
वर्तमान में जल संस्थान को साढ़े 16 लाख लीटर पानी की आवश्यकता है, जिसके विपरीत विभाग केवल साढ़े पांच लाख लीटर पानी ही उपलब्ध करा पा रहा है। ऐसी स्थिति में गर्मियों में लोगों को किस तरह की दिक्कतें पेश आएंगी, समझा जा सकता है। यहां सरयू नदी से लिफ्ट पेयजल योजना के निर्माण के लिए जनप्रतिनिधियों के केवल मुंहजबानी बयान चल रहे हैं। हालांकि जल निगम की ओर से 2006 से लिफ्ट पेयजल योजना का सर्वेक्षण शुरू किया गया था, जो सात वर्षों तक चलता रहा।
विभाग की ओर से सितंबर 2013 में 43.95 करोड़ लागत की डीपीआर शासन को भेजी गई है। जिस पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। योजना की डीपीआर स्वीकृत होने में हो रही देरी से योजना की लागत राशि प्रतिवर्ष बढ़ती जा रही है, जबकि नगर में जल संकट दिनोदिन गहराता जा रहा है।
सरयू लिफ्ट योजना को मंजूरी का इंतजार
नगर पंचायत अध्यक्ष लता वर्मा का कहना है कि पेयजल समस्या से जूझना नगर के लोगों की नियति बन चुका है। लोग सरयू लिफ्ट पेयजल योजना को स्वीकृति मिलने की इंतजारी कर रहे हैं। यहां लिफ्ट पेयजल योजना के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है।
वैकल्पिक प्रयासों में जुटा जल संस्थान
जल संस्थान के अभियंता विशाल सक्सेना का कहना है कि नगर की पेयजल समस्या का समाधान सरयू लिफ्ट पेयजल योजना से हो सकता है। बहरहाल विभाग की ओर से इस दिशा में वैकल्पिक प्रयास किए जा रहे हैं। ऋषेश्वर में नलकूप के पास 70 हजार लीटर क्षमता का टैंक प्रस्तावित किया गया है। जिसमें फोर्ती और नर्सरी गधेरे का पानी डालकर नलकूप के जरिए बनस्वाड़ टैंक में डाला जाएगा। जिसमें डेढ़ घंटे में 70 हजार लीटर पानी मिलेगा।