राज्य सरकार की ओर से बंजर भूमि में चाय बागानों को विकसित करने की तर्ज पर ही ड्राई फ्रू्ट्स अखरोट के उत्पादन को बढ़ावा देने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है, जिसके तहत विभिन्न गांवों में खाली पड़ी भूमि पर महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से अखरोट की पैदावार बढ़ाई जाएगी। प्रत्येक जिले में सहायक निबंधक सहकारिता को योजना के संचालन के लिए नोडल अधिकारी बनाया गया है।
इसी के साथ ही चंपावत जिला मुख्यालय के समीपवर्ती लटोली गांव को पहले सहकारी अखरोट ग्राम के रूप में चयनित किया गया है।
पर्वतीय क्षेत्र में एक हजार से पांच हजार मीटर की ऊंचाई वाले इलाकों में होने वाली अखरोट की विभिन्न प्रजातियों को बढ़ावा देने के लिए औद्यानिकी मिशन के तहत कार्ययोजना तैयार की गई है।
अब तक राज्य के पर्वतीय अंचलों में जंगलों में ही अखरोट का उत्पादन होता था। पहली बार राज्य सरकार की ओर से महिला स्वयं सहायता समूहों को पौध उपलब्ध कराकर उन्हीं के माध्यम से गांवों में खाली और बंजर पड़ी भूमि पर अखरोट की पैदावार बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।