ये संयोग है कि जिला मुख्यालय में एक दशक में आग की बड़ी वारदात नहीं हुई है, लेकिन अगर यहां कोई बड़ा अग्निकांड हुआ, तो इससे बचाव के लिए यहां कतई बंदोबस्त नहीं है। यहां की आग बुझाने की जिम्मेदारी 15 किलोमीटर दूर लोहाघाट शहर की है। जिला मुख्यालय में फायर स्टेशन नहीं है। लोहाघाट से आग बुझाने को फायरब्रिगेड यहां पहुंचने तक करीब 30 मिनट का वक्त लगता है।
ये तस्वीर जिला बनने के 18 साल बाद है। अग्नि हादसों के समय यहां के लोग मदद के लिए लोहाघाट फायर स्टेशन पर मजबूर हैं। बाराकोट और पाटी क्षेत्र के लोग भी आग लगने पर लोहाघाट पर आश्रित हैं। करीब 14 साल पहले चंपावत बाजार में एक दुकान के अलावा फरवरी 2007 में मौनपोखरी वन विभाग के गेस्ट हाउस में आग लगी थी। जिले के निजी भवन, व्यापारिक प्रतिष्ठान, स्कूल, औद्योगिक इकाइयों, धार्मिक स्थलों, बैंकों सहित अन्य स्थानों में आग लगने पर बचाव के उपाय भगवान भरोसे हैं।
अलबत्ता अग्नि दुर्घटनाओं से निपटने के लिए सरकारी कार्यालयों और भवनों में हाइड्रेंड हैं। पुलिस भी मानती है कि फायर स्टेशन नहीं होने से आग लगने पर फौरन मदद करने में दिक्कत आती है। अलबत्ता उनका कहना है कि इसके बावजूद बचाव के प्रबंध करने का प्रयास किया जाता है।
चंपावत में फायर स्टेशन का प्रस्ताव काफी पहले मुख्यालय भेजा गया है। नियमित अंतराल में यहां फायर स्टेशन के औचित्य की सूचना भेजी जा रही है। प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद ही आगे की कोई कार्रवाई संभव है। -दिलीप सिंह कुंवर, एसपी, चंपावत।
आग से पुराना बाजार जल गया था
चंपावत में करीब तीन दशक पहले पुरानी बाजार में भीषण अग्निकांड हुआ था, जिसमें डाकघर भवन समेत तमाम बाजार जल गया था। कई करोड़ का नुकसान हुआ था। अप्रैल 2007 में टनकपुर लीसा डिपो में लगी आग में दस करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ था।
लोहाघाट फायर स्टेशन के पास भी अपना भवन नहीं
जिले का सबसे पुराना फायर स्टेशन लोहाघाट में है, लेकिन इसके पास भी अपना भवन नहीं है। फायर सर्विस अफसर राम सिंह ने बताया कि फायर स्टेशन फिलहाल थाना परिसर से ही संचालित है। आवासीय व्यवस्था भी ठीक नहीं है।
टनकपुर में बदहाली में हैं फायरमैन
जिले के मैदानी हिस्से टनकपुर में 2011 में फायर स्टेशन खुला है। टनकपुर से चंपावत का फासला 75 किमी है, मगर यहां फायर स्टेशन का अपना भवन नहीं है। फायर कर्मियों के रहने का भी कोई इंतजाम नहीं है। ये कर्मी शारदा के पास डेढ़ दशक पूर्व बने पूर्ति विभाग के एक गोदाम में रात काटने को मजबूर हैं।
लोहाघाट से दूरी
चंपावत : 15 किमी
बाराकोट : 23 किमी
पाटी : 30 किमी
देवीधुरा : 43 किमी
पंचेश्वर : 39 किमी