लोहाघाट/चंपावत। बाराकोट में लड़ीधुरा के जंगलों में लगी आग शनिवार को जीआईसी बाराकोट तक पहुंच गई। आग लगने से वन संपदा और वन्यजीवों को भारी नुकसान पहुंचा है। आग के विद्यालय परिसर तक पहुंचने से यहां लगाए गए छायादार पेड़ों और फूलों को नुकसान पहुंचा है।
मुख्य भवन तक आग आने पर विद्यालय के प्रशासनिक अधिकारी नगेंद्र जोशी, कार्यालय कर्मचारी भगवान लाल वर्मा और दिव्यांग कर्मी मकर सिंह बोहरा ने विद्यालय में उपलब्ध अग्निशमन यंत्र और पेड़ की टहनियों से आग किसी तरह बुझाया। वहीं शुक्रवार रात भर लोहाघाट के शंखपाल और भूमलाई के जंगल धधकते रहे।
काली कुमाऊं के रेंजर राजेश जोशी ने बताया कि बाराकोट क्षेत्र के लड़ीधुरा जंगलों में लगी आग को काबू पर पाने के लिए वन कर्मियों को भेजा गया है। उन्होंने कहा कि कुछ अराजक तत्व जंगलों में आग लगा दे रहे हैं जिससे काफी नुकसान हो रहा है। रेंजर ने कहा कि आग लगाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इधर चंपावत में शनिवार को दोपहर में अराजक तत्वों ने मानेश्वर के जंगलों में अगा लगा दी। इससे वन संपदा को काफी नुकसान पहुंचा है। रेंजर बृजमोहन टम्टा ने बताया कि सूचना मिलते ही वन विभाग के कर्मियों को मौके पर भेदा गया। वन कर्मियों ने आग को बुझा दिया है। संवाद
दो माह में 12 आग की घटनाओं में 9.12 हेक्टेयर जंगल जला
चंपावत। फायर सीजन का दो माह से अधिक का समय बीत गया है। इन दो माह में चंपावत डिवीजन में वनाग्नि की 12 बड़ी घटनाएं हुईं। इसमें 9.12 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंचा है। हालांकि इस बार आग की घटनाएं अभी कम देखने को मिल रही हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान वन विभाग को आग की घटनाओं पर काबू पाने के लिए जूझना पड़ा।
रेंजर समेत करीब 111 कर्मी चुनाव ड्यूटी में तैनात रहे। 15 फरवरी से शुरू हुए फायर सीजन में इस बार अभी तक 12 वनाग्नि की घटनाएं विभाग में दर्ज हैं। इन घटनाओं में 9.12 हेक्टेयर जंगल जलकर नष्ट हो गया है। धीरे-धीरे पहाड़ों में गर्मी बढ़ने के साथ आग की घटनाएं भी बढ़ने लगी हैं। विभाग की ओर से वनाग्नि को रोकने के लिए 54 क्रू स्टेशन के माध्यम से 216 फायर वाचर तैनात किए गए हैं। चंपावत डिवीजन में 10 वर्षों में आग की सबसे अधिक घटनाएं वर्ष 2019 में हुई थी। तब 111 वनाग्नि की घटनाएं हुई थी। सबसे कम 2014 में मात्र एक वनाग्नि की घटना हुई थी।
चंपावत डिवीजन में 10 वर्षों में आग लगनी घटनाएं
वर्ष - आग की घटनाएं - प्रभावित क्षेत्र हेक्टेयर
2014 - 01 - 02.00
2015 - 15 - 15.00
2016 - 62 - 137.50
2017 - 34 - 50.40
2018 - 84 - 136.46
2019 - 111 - 161.93
2020 - 08 - 07.50
2021 73 - 55.77
2022 80 - 52.25
2023 25 - 15.52
कोट
बीते दो माह में अभी तक आग की 12 घटनाओं में 9.12 हेक्टेयर जंगल जला है। वनाग्नि को रोकने के लिए विभाग के कर्मियों को आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए गए है। जंगलों में आग लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा रही है। - आरसी कांडपाल, डीएफओ, चंपावत।
मां पूर्णागिरि से सटे जंगल में लगी आग
टनकपुर (चंपावत)। बूम वन रेंज के अंतर्गत मां पूर्णागिरि से सटे जंगल में आग लग गई। आग से पुजारियों की निजी पेयजल पाइप लाइन जलकर नष्ट हो गई। वन कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
मां पूर्णागिरि धाम से सटा जंगल नेपाल सीमा तक फैला हुआ है। बताया गया कि बूम रेंज के अंतर्गत टुन्यास से सटे जंगल में दो दिन पहले आग लग गई थी। यह आग कंट्रोल होते ही शनिवार को सिद्धमणि, कुलाड़ी के जंगल धधकने लगे। आग बढ़ते-बढ़ते पेयजल स्रोतों से गुजर रही निजी पाइप लाइन तक पहुंच गई।
इससे पूरन पांडेय, हरीश पांडे, लखन तिवारी, मथुरा, ज्योति तिवारी, नवीन उप्रेती, धर्मानंद तिवारी आदि की निजी लाइन जल गई। बूम रेंजर गुलजार हुसैन ने बताया कि बृहस्पतिवार को टुन्यास के पास आग लगी थीजिसे बुझा दिया था। शुक्रवार को कुछ जगहाें पर फिर आग लगने की घटनाएं हुई हैं। सूचना पर वन कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पा लिया है।
इधर शारदा रेंज के रेंजर पीसी जोशी ने बताया कि दोपहर में किरौड़ा के पास मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति ने जंगल में आग लगा दी। सूचना पर पहुंचे वन कर्मियों ने आग पर काबू पाया। मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति को पकड़कर नगर में पहुंचाया। वहीं थ्वालखेड़ा के पास भी जंगल में आग लगी। वन कर्मियों ने वनाग्नि को फैलने से रोका। संवाद