लोहाघाट (चंपावत)। पीपीपी मोड में संचालित अस्पताल में अव्यवस्थाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं, जिस उद्देश्य को लेकर राज्य सरकार ने अस्पताल को पीपीपी मोड को सौंपा गया था, उसमें रोगियों की अधिक फजीहत हो रही हैं। वहीं, एक सप्ताह से पीपीपी मोड के 12 डॉक्टरों के स्थान पर मात्र दो डॉक्टर ही अस्पताल में सेवाएं दे रहे हैं, जिसमें सीएमएस डॉ. मंजीत सिंह और डॉ. जितेंद्र जोशी रोगियों का इलाज कर रहे हैं।
सीएमएस के अनुसार पीपीपी मोड के डॉक्टरों को जनवरी से वेतन नहीं मिला है, जिससे गुस्साए अधिकांश डॉक्टर सामूहिक रूप से होली से पहले अवकाश में चले गए थे, जो अब तक नहीं लौटे हैं, जिसका खामियाजा रोगियों को भुगतना पड़ रहा है। दूरदराज स्थानों से आने वाले रोगी निराश होकर लौट रहे हैं।
अस्पताल को पीपीपी मोड से हटाने के लिए कई बार राजनैतिक, सामाजिक संगठनों ने आंदोलन किया, लेकिन अस्पताल को पीपीपी मोड में हटाने के बजाय उसका रिन्युअल किया जाता रहा। वर्तमान में डॉक्टरों की भारी कमी के चलते रोगियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सीएमएस के अनुसार पीपीपी मोड की एक महिला चिकित्सक और एक ईएमओ द्वारा ही सेवाएं दी जा रही हैं। सबसे अधिक दिक्कतें गर्भवती महिलाओं को हो रही हैं। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा न होने के कारण उन्हें अन्य प्राइवेट अस्पताल में जाना पड़ रहा है, जिससे उनके धन और समय की अनावश्यक बर्बादी होती है।